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सिटी हॉस्पिटल पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू

Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
Bareilly
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नगर निगम ने अपनी संपत्ति घोषित करते हुए बोर्ड लगाए, दीवारों पर भी दर्ज की सूचना
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सिटी रिपोर्टर
बरेली। नगर निगम के अफसरों ने शुक्रवार को सिटी हॉस्पिटल की जमीन को अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। उपनगर आयुक्त की अगुवाई में हॉस्पिटल पहुंची नगर निगम की टीम ने इस जमीन को अपनी संपत्ति घोषित करते हुए जगह-जगह बोर्ड लगा दिए, साथ ही दीवारों पर भी यही सूचना दर्ज कर दी। इस कार्रवाई से हॉस्पिटल में अफरातफरी का माहौल रहा। नगर निगम प्रशासन इसके बाद हॉस्पिटल प्रशासन को इस जमीन को खाली करने का नोटिस जारी करेगा।
उदयपुर खास में जिस जमीन पर सिटी हॉस्पिटल बना है, उसे नगर निगम ने पूर्व मंत्री धर्मदत्त को लीज पर जमीन आवंटित किया था। उन्होंने ही यहां सिटी हास्पिटल बनवाया। इस लीज का सन् 1979 में नवीनीकरण होना था, लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन ने नवीनीकरण नहीं कराया। नगर निगम प्रशासन ने सन् 2003 में यह आवंटन निरस्त कर दिया। नगर निगम प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ हॉस्पिटल प्रबंधन ने हाईकोेर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने सिटी हॉस्पिटल की जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। शुक्रवार दोपहर उपनगर आयुक्त डीके सिन्हा की अगुवाई में पहुंची नगर निगम की टीम ने अस्पताल की चारों दीवारों पर लिखवा दिया कि यह संपत्ति नगर निगम की है। इसके अलावा हॉस्पिटल के मेन गेट के साथ जगह-जगह इसी तरह के बोर्ड भी लगवा दिए। इस कार्रवाई के दौरान हॉस्पिटल में मौजूद मरीजों और तीमारदारों में अफरातफरी का माहौल रहा। उपनगर आयुक्त ने बताया कि खसरा नंबर 82, 83, 84,85, 86 और 89 की जमीन नगर निगम की संपत्ति है। इसका रकबा कुल मिलाकर 10376 वर्ग फीट है। हॉस्पिटल प्रबंधन और दूसरे आवंटियों को नोटिस भी जारी किया जा रहा है। उधर, कुछ सभासदों का कहना है कि वास्तविक कब्जा लेने में नगर निगम के अफसर जानबूझकर देरी कर रहे हैं।
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हॉस्पिटल में एलिवेटर लाने पर नोकझोंक
सिटी हॉस्पिटल परिसर में बोर्ड लगाने के लिए नगर निगम की टीम एलिवेटर लेकर दाखिल हुई तो हॉस्पिटल प्रबंधन के लोगों ने इसका विरोध किया। इस पर उप नगर आयूुक्त डीके सिन्हा से उनकी नोकझोंक भी हो गई। उपनगर आयुक्त ने कहा कि यह संपत्ति नगर निगम की है, लिहाजा यहां एलिवेटर लाने का विरोध करने का किसी को अधिकार नहीं है। कुछ देर नोकझोंक के बाद हॉस्पिटल प्रबंधन शांत हो गया।
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