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छोटा प्रोजेक्ट पास कराओ... बड़े का मजा पाओ

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बरेली। रियल एस्टेट रेग्यूलेटिंग एक्ट अधिनियम यानी रेरा का फेरा लखनऊ से बरेली तक फैला हुआ है। लखनऊ में जिस शाइन सिटी बिल्डर्स का 58 भूखंडों का रेरा में पंजीकरण कराकर 3000 की बुकिंग कर लिए जाने के मामले का भंडाफोड़ हुआ है, उसी बिल्डर ने बरेली में भी यही खेल किया है। इस बिल्डर के बरेली में बाईपास पर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में पंजीकृत भूखंडों का संख्या पंजीकृत संख्या से ज्यादा होने का मामला सामने आया है, हालांकि बीडीए फिलहाल इस पर खामोश है।
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रेरा में बरेली के छोटे और बड़े मिलाकर 44 प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं। इनमें भी कई परियोजनाओं का रेरा में कम संख्या दिखाकर पंजीकरण कराया गया है जबकि मौके पर इन परियोजनाओं का क्षेत्रफल छह से 10 गुना तक ज्यादा है। बीडीए की अनदेखी की वजह से बड़ा बाईपास तो पहले से तमाम अवैध कालोनियां बन रही हैं लेकिन जो कालोनियां वैध हैं, उनमें भी बीडीए से कम एरिया का नक्शा मंजूर कराकर वहां भूखंड कई गुना ज्यादा संख्या में बेचे जा रहे हैं। बीडीए के रामगंगा नगर आवासीय योजना में जो प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत हैं, उन्हें छोड़कर 38 निजी प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत हैं। इनमें सिविल लाइंस, बदायूं रोड, बीसलपुर रोड, पीलीभीत बाईपास रोड, मिनी बाईपास से कर्मचारी नगर रोड पर बीडीए से नक्शा कम एरिया का पास कराकर ज्यादा भूखंड बेचे गए हैं। कहीं-कहीं तो एक ही प्रोजेक्ट को बिल्डर दो या तीन अलग-अलग मिलते जुलते नामों से बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। इस खेल में सरकारी राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। रेरा की लखनऊ टीम ने शाइन सिटी बिल्डर्स के गोलमाल की जांच शुरू कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही रेरा की टीम बरेली की पंजीकृत परियोजनाओं की भी जांच कर सकती है।

रेरा में कम एरिया का प्रोजेक्ट दिखाकर ज्यादा भूखंड या आवास बेचने का मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसा है भी तो इसकी जांच रेरा की टीम ही करेगी। बीडीए के पास ऐसा मामला आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -अंबरीश कुमार, सचिव बीडीए
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