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नुमाइंदगी न होने से मायूस मुस्लिमों ने नहीं दिखाया जोश

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बरेली। मुस्लिम वोटों पर दावा ठोकने वाले राजनीतिक दलों को इस बार चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद शायद इस मुद्दे पर गहन मंथन करना पड़ेगा कि हर चुनाव में पूरे जोशोखरोश के साथ एक-एक वोट चुनकर डालने वाले मुसलमानों ने इस बार उतनी दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई। चुनाव से पहले शायद ही इस बात पर कोई एतबार कर पाता, लेकिन अब आंकड़े बता रहे हैं कि मुस्लिम बहुल इलाकों के कई बूथों पर 50 फीसदी भी मतदान नहीं हुआ। फिलहाल एक प्रमुख वजह तो इस चुनाव में मुस्लिमों की कोई नुमाइंदगी न होना मानी जा रही है, लेकिन कयासों में कई और भी कारण बताए जा रहे हैं।
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हालांकि 23 अप्रैल को सुबह जब मतदान शुरू हुआ तो मुस्लिम बहुत बूथों पर लंबी लाइनें दिखी थीं। इससे लगा था कि मुस्लिम वोटर मोदी सरकार को हटाने के लिए पूरे दमखम से वोट करने निकला है। उम्मीद 75 से 80 फीसदी वोटिंग की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। यह जरूर हुआ कि प्रतिक्रियास्वरूप हिंदू मतदाता भाजपा के पक्ष में वोटिंग करने निकल पड़ा। दोपहर 12 बजे के बाद हिंदू बहुल बूथों पर भारी भीड़ दिखाई दी। एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं जब यह लगा कि हिंदुओं में जातीय विभाजन इस बार पहले की तरह नहीं है तो उसका जोश कम हो गया। बदायूं में कांग्रेस के सलीम शेरवानी को छोड़कर बरेली मंडल की बाकी सीटों पर कोई मुसलमान उम्मीदवार भी नहीं था। कहा यह भी जा रहा है कि मोदी और योगी सरकार से नाराज मुसलमानों ने भाजपा को हराने के लिए सपा-बसपा गठबंधन को चुना तो लेकिन जब दलितों और यादवों का बड़ी संख्या में वोट भाजपा के पक्ष में जाते देखा तो उनका हौसला ठंडा पड़ गया। दोपहर में माहौल भांपने और हिंदू ध्रुवीकरण को रोकने के लिए वे कुछ थमे और उसके बाद शाम को फिर जोर लगाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

कई मुस्लिम बहुल बूथों पर 40 फीसदी से भी कम हुआ मतदान
शहर में सीबीगंज, बुधौलिया के आईटीआई, किला में तिलक इंटर कालेज, मौलाना आजाद इंटर कालेज, जगतपुर में सरस्वती विद्या मंदिर मतदान केंद्रों के अलावा नवाबगंज में मुस्लिम बहुल श्री कृष्णा इंटर कालेज मतदान केंद्रों पर दोपहर बाद तक सन्नाटे की स्थिति थी। इनमें से अधिकांश केंद्रों पर 50 या 55 फीसदी ही वोट पड़ पाए, जबकि इन बूथों पर कम से कम 70 से 80 फीसदी तक मतदान होने की उम्मीद थी। मुस्लिम बहुल भोजीपुरा के मिश्रित आबादी वाले इलाकों में 65 फीसदी तो मुस्लिम बहुल बूथों पर 60 फीसदी से कम मतदान हो पाया। आंवला के बिथरी चैनपुर में 60.20 फीसदी वोट पड़े। मीरगंज में 50 फीसदी मतदान हुआ। मुसलमानों के प्राइमरी स्कूल हाजीपुर बूथ पर 37 फीसदी वोटिंग ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। फतेहगंज पूर्वी में 21.22 फीसदी मतदान ही हो पाया। मुस्लिम बहुल उमरिया गांव में 8700 वोट थे, जिनमें 40 फीसदी से कम वोट पड़े। ठिरिया में 62 प्रतिशत, मोहनपुर में 51 प्रतिशत, परसोना में 40 प्रतिशत ही वोट पड़ पाए। मनपुरिया में 60 फीसदी वोटिंग हुई। उमरिया गांव के मोहम्मद इस्लाम का कहना था कि वोटिंग को लेकर बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि हर पार्टी तो मुसलमानों के वोट तो लेना चाहती है लेकिन करता कोई कुछ नहीं।
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