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कांवड़ पथ पर अब एंबुलेंस का सहारा

Thu, 04 Aug 2016 02:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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कांवड़ पथ पर अब एंबुलेंस का सहारा
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मरीज ही नहीं सवारियां भी इन्हीं से जा रही हैं शहर से बाहर
एक- बदायूं रोड के व्यवसायी अशोक सक्सेना को चार दिन पहले एंजियोग्राफी के लिए राजेंद्र नगर स्थित अस्पताल से दिल्ली जाने को कहा गया है लेकिन  सावन में हाईवे ब्लॉक होने के चलते दिल्ली जाने का प्लान नहीं बना पा रहे हैं।
 दो- मढ़ीनाथ में एक घर के बाहर एम्बुलेंस देख कर पड़ोसी चौंके पता चला कि घर में सब खैरियत से हैं बिटिया को मेरठ भेजना है इसलिए सेफ जर्नी के लिए एम्बुलेंस मंगा ली है। 
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तीन- शहर के एक निजी अस्पताल के पास छह से अधिक एंबुलेंस हैं। जब से सावन आया है तब से इनकी एंबुलेंस की बुकिंग शहर की बाहर के लिए ज्यादा हो रही है। 
चार - जिला अस्पताल में रोजाना खड़ी रहने वाली निजी एंबुलेंस इन दिनों गायब हैं। इमरजेंसी में भर्ती धीरज को शाहजहांपुर जाना था। दो दिन बाद एंबुलेंस मिली। धीरज गए तो साथ में दो अन्य पड़ोसी भी उन्हीं के साथ चले गए। 
बरेली। सावन में कांवड़ की वजह से हाइवे ब्लॉक हैं। निजी सरकारी सभी वाहन बंद हैं लेकिन एंबुलेंस चल रही हैं। खास बात ये कि मरीजाें को ले जाने वाली एंबुलेंस आजकल सवारियां भी ढो रही हैं। पुलिस इन्हें रास्ता दं देती है और कावंडिए भी किनारे हो जाते हैं। निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि उनके अस्पताल में मरीजों को लाने ले जाने को ठेके पर चलने वाली दो एंबुलेंस है। अस्पताल के एंबुलेंस चालक रमेश ने बताया कि कांवड़ के दौरान उनको कोई नहीं रोकता, इसलिए बाहर जाने वाले अधिक मिलते हैं। सवारी की बात से वह इंकार करते हैं। 
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कागजों में सिर्फ 109 एंबुलेंस 
शहर में करीब एक हजार से अधिक एंबुलेंस घूम रही हैं। जबकि आरटीओ कार्यालय में 109 एंबुलेंस ही शहर में पंजीकृत हैं। जिन अस्पतालों के बाहर छह से आठ एंबुलेंस खड़ी होती हैं उनके नाम पर भी केवल दो से चार एंबुलेंस ही पंजीकृत हैं। आज तक एक भी एंबुलेंस की जांच नहीं हो सकी।    
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