बरेली। सिंचाई मंत्री के गृह जनपद से निकली अरिल नदी को ‘जिंदा’ करने के लिए करीब 30 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी शुरू हो गई है। नदी में फिर से कल-कल की गूंज सुनाई दे और हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की दिक्कत दूर हो सके, इसके लिए बाढ़ खंड की टीम ने नदी का सर्वे भी शुरू कर दिया है। हाल में टीम ने रामपुर जिले की सीमा में पड़ने वाले नदी के उद्गम स्थल अहमदनगर (नयागांव) पहुंचकर भी स्थिति का मुआयना कर लिया है। प्रमुख सचिव के आदेश के बाद बाढ़ खंड के अफसरों ने पूरा प्रोेजेक्ट तैयार करके शासन को भेज दिया है। हालांकि बजट आने तक विभागीय इंजीनियर शुरूआती सर्वे पूरा कराने की जानकारी दे रहे हैं।
बदायूं, बरेली और रामपुर जिलों की सीमा में नदी की जलधारा 137 किलोमीटर लंबी है। बरेली में 57 किलोमीटर और बदायूं में 65 किलोमीटर का सफर तय करके नदी दातागंज के जमालपुर मधुकर नवादा में रामगंगा में मिलती है। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के क्षेत्र आंवला के भी करीब चार दर्जन गांवों के बीच से होकर यह गुजरती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस नदी की कायाकल्प पर कोई ध्यान नहीं दिया। हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने वाली इस नदी का अतिक्रमण की वजह से दम घुट चुका है। सिंचाई मंत्री के खास दिलचस्पी लेने से इस नदी के कायाकल्प का फिर से बीड़ा उठाया जा रहा है। बाढ़ खंड की टीम ने हाल में इस नदी का सर्वे किया है, जिसमें नदी की जलधारा उद्गम स्थल से केवल 67 किलोमीटर तक ही मिली है। उसके आगे सिल्ट या खेती होने से अरिल का वजूद ही खत्म हो गया है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद बाढ़ खंड के एक्सईएन कुंदन सिंह ने विभागीय टीम के साथ बदायूं-बरेली की सीमा पर अहमदनगर और आंवला के गांव मऊचंदपुर सहित कई जगहों पर पहुंचकर सर्वे किया है। करीब 30 करोड़ के कायाकल्प के लिए बाढ़ खंड के चार डिवीजन (इसमें दो बदायूं और दो बरेली के हैं) के अधिकारियों ने डीपीआर बनाने का काम पूरा कर लिया है।
जीपीएस सर्वे में 40 मीटर चौड़ी नदी चार मीटर भी नहीं निकली
नदी की वास्तविक किनारों की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जीपीएस से सर्वे कराया था, जिसमें आंवला सहित कई क्षेत्रों में नदी अतिक्रमण की वजह से काफी संकरी मिली थी। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि उनके रिकार्ड के अनुसार नदी की चौड़ाई 18 से लेकर 40 मीटर तक है। जबकि जीपीएस सर्वे में कई जगह चौड़ाई चार मीटर तो कहीं उससे भी कम मिली है। अतिक्रमण हटाने का काम राजस्व विभाग की टीम को करना है। उसके लिए यह काम कड़ी चुनौती है।
पूर्व डीएम की पहल ने भी दम तोड़ा
अरिल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए पूर्व डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह और सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने खास दिलचस्पी लेते हुए मझगवां के लोहारी गांव में मनरेगा के तहत काम शुरू कराया था। इसी साल अप्रैल में शुरू हुए इस अभियान में सिल्ट सफाई का काम होना था लेकिन बाद में यह अभियान कुछ समय तक चला और बाद में इसने दम तोड़ दिया।
अरिल नदी का हाल में सर्वे किया है। करीब तीस करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। नदी का कायाकल्प करने के लिए काम जोरशोर से शुरू होना है। - कुंदन सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड