बरेली। इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) की ओर से इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर तहफ्फुजे शरीयत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें कानून और लोकतंत्र की हिफाजत पर चर्चा की गई। कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जो लोग देश का कानून बदलने की बात कह रहे हैं वे कभी कामयाब नहीं होंगे। लंबे संघर्ष के बाद हमने संविधान पाया है। यह देश के विश्वास का प्रतीक है। इसे बचाने के लिए जिंदगी दे देंगे, मगर बदलने नहीं देंगे।
कांफ्रेंस के विशिष्ट अतिथि फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि आज मुसलमानों की वतनपरस्ती पर शक किया जाता है। अगर हमें इस देश से जाना होता तो 1947 में ही चले जाते। हमें यहीं रहना है, यहीं मरना है। देश के लिए मुस्लिमों की दी कुर्बानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अच्छी बात है ये होना चाहिए, अगर इसके साथ सांप्रदायिकता की गंदगी को भी साफ किया जाए तो अच्छा है।
अध्यक्षता कर रहे आईएमसी के मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां ने तीन तलाक और हलाला का मुद्दा उठाया। मौजूदा हुकूमत के कुछ कामों को मुस्लिमों की बेहतरी के लिए बताया तो कई मुद्दों पर डटकर आलोचना भी की। कहा, मोदी जिक्रे हुसैन सुनने मस्जिद में जाते हैं। आरएसएस ने भी जुबान बदल ली है, मगर मुसलमान आरएसएस से प्यार नहीं करता, अगर चाहते हैं कि मुसलमान भी प्यार करे तो आरएसएस अपने मुख्यालय पर तिरंगा लगाए। इससे पूर्व फैजाबाद से सोशल एक्टिविस्ट गोपाल कृष्ण, अलीगढ़ से प्रोफेसर शकील समनानी, पूर्व मंत्री जाहिद रजा, बहुजन मुक्ति मोर्चा के महासचिव बंसी लाल यादव, सोशल एक्टिविस्ट जॉन दयाल, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन दिल्ली के प्रोफेसर हफीजुर्रहमान ने किया। इस दौरान डॉ. नफीस खां, मुनीर इदरीसी, नदीम खां, अफजाल बेग, डॉ. रिजवान, एम. इकबाल, सलीम खां, कौसर वारसी आदि मौजूद रहे।