बरेली। घोड़ों के हमले के बाद अब बंदरों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। बंदरों के हमले में छत से गिरकर दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। पहले हमले में किला क्षेत्र में संदल खां बजरिया निवासी मोहम्मद हनीफ की बेटी 17 वर्षीय मंतशा घायल हो गई। मंतशा रविवार को छत पर कपड़े सुखाने गई थीं। तभी पहले से छत पर मौजूद बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया। डरकर भागी मंतशा फिसलकर छत से नीचे आंगन में गिर पड़ी, उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है।
दूसरी घटना में पीडब्ल्यूडी में चौकीदार श्याम स्वरूप सक्सेना पर भी बंदरों के झुंड ने शनिवार देर रात हमला बोल दिया। प्रेमनगर निवासी 45 वर्षीय श्याम स्वरूप सक्सेना रात में छत पर गए थे। वहीं अंधेरे में बैठे बंदरों के झुंड ने उन पर अचानक हमला बोल दिया, जिससे वह घबरा गए और भागने लगे। इसी बीच एक बंदर ने उनकी पीठ पर काट लिया। बंदर के काटने के दौरान उनका ध्यान भटक गया और वह छत से आंगन में गिर पड़े। उनका इलाज जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है।
बंदरों के हमले में पहले भी कई लोग हो चुके हैं जख्मी
उत्पाती बंदरों के हमले से इससे पहले भी कई लोग घायल हो चुके हैं। इज्जतनगर निवासी सुनीता की दो माह की बेटी गीतांजलि को बंदर ने काट लिया था। खजुरिया में एक बंदर तो एक-एक कर करीब 50 लोगों को काट चुका हैं। गंभीर रूप से घायल शिबू चंद यादव की पत्नी की मौत भी हो गई थी। काटने के अलावा सामान का भी नुकसान कर रहे हैं। छत और आंगन से कपड़े उठा ले जा रहे हैं। डिश की छतरी आए दिन तोड़ दे रहे हैं। बंदरों के आतंक से बचने के लिए कुछ लोगों ने आंगन में लोहे की जाली लगा रखी है। डिश की छतरी के चारों तरफ कटीले तार बांध रखे हैं।
वन विभाग की अनुमति नहीं
एक तरफ जहां बंदरों के आतंक से लोग सहमे हुए हैं। वहीं वन विभाग उन्हें पकड़ने की अनुमति नगर निगम को देने से बच रहा है, जबकि नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए दो ठेकेदारों को टेंडर दे दिए हैं। बंदरों को पकड़ कर जंगल में भेजने के लिए नगर निगम वन विभाग को अब तक दस से अधिक पत्र लिख चुका है, लेकिन अनुुमति नहीं मिलने से बंदरों को पकड़ने का काम बंद हैं। व्यापारियों ने भी वन विभाग से मुलाकात की थी, मगर कोई फायदा नहीं हुआ।
वन विभाग से अनुमति मांगी है। मगर अब तक बंदरों को पकड़ने की अनुमति नहीं मिली है। कम से कम एक हजार बंदरों को ही पकड़ने की अनुमति मिल जाए।
- राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक से अनुमति मांगी गई है। रविवार को लखनऊ में हुई मीटिंग में भी इस बात को रखा गया है। उम्मीद है कि अनुमति जल्द मिल जाएगी।
- भरत लाल, डीएफओ
जंगली गायों से हमले में घायल किसान की मौत
अलीगंज/ आंवला। तीन दिन पहले रामगंगा के खादर में जंगली गायों के हमले में घायल हुए ग्रामीण की उपचार के दौरान मौत हो गई।
गैनी चौकी क्षेत्र के गांव सुदनपुर निवासी 56 वर्षीय किसान सोमपाल लोधी पांच अक्टूबर की शाम अपने खेत में पालतू पशुओं के लिए चारा काट रहा था। इसी दौरान जंगली गायों के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। आसपास के किसानों ने शोर मचाकर जब तक पशुओं को हटाया, तब तक ग्रामीण गंभीर घायल हो चुका था। रविवार को उपचार के दौरान उसकी बरेली के अस्पताल में मौत हो गई। बता दें कि इससे पहले जंगली पशुओं के हमले से खादर के जंगल में झाला बनाकर रह रहे नकल सिंह और भूरे यादव की मौत हो चुकी है। धनेती निवासी वेदराम भगत व रामेश्वर सिंह भी घायल हो चुके हैं। एसडीएम विशु राजा ने बताया कि मृतक के परिजनों को सर्वहित बीमा योजना और पारिवारिक जीवन बीमा का लाभ आवेदन करने पर मिल सकता है।