बरेली। गाजियाबाद की साइबर सेल ने बृहस्पतिवार को बाराबंकी से आंवला के युवक को गिरफ्तार कर पबजी गेम के टूल बेचने के नाम पर सौ बच्चों से 50 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी करने के मामले का खुलासा किया। एमए पास 25 वर्षीय शातिर आरोपी विशांत बाबू उर्फ ईलू ने इंस्टाग्राम पर आर्यन खत्री के नाम से पेज बनाकर टूल की दुकान सजा रखी थी।
आरोपी ईलू से बरेली के आंवला के मोहल्ला फू टा दरवाजा का रहने वाला है। दो साल से वह बाराबंकी के कुर्सी औद्योगिक क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। वह अकेला ही बच्चों के साथ ठगी का यह खेल कर रहा था। वह दावा करता था कि इन टूल की मदद से गेम का हर लेवल (स्तर) आसानी से पार हो सकता है। ऑनलाइन गेम के दीवाने जो बच्चे इस झांसे में फंस जाते, उनसे रकम ऐंठ लेता था।
गाजियाबाद के नेहरू नगर में रहने वाले एक बच्चे के साथ 2.76 लाख की ठगी होने पर मामला पुलिस के पास पहुंचा। साइबर सेल ने जांच शुरू की तो पता चला कि ईलू और भी बच्चों को ठग चुका है। गाजियाबाद की साइबर सेल के मुताबिक ईलू से पौने दो लाख कीमत की सोने की चेन, तीन मोबाइल, पैन कार्ड, आधार कार्ड और दो डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं। उसके खातों की डिटेल से पता चला है कि वह दो साल से ठगी कर रहा था।
आठ सौ रुपये मांगे, ले लिए 2.76 लाख
नेहरु नगर के जिस बच्चे के साथ ठगी की, उसे पबजी का अगला लेवल पार करने के लिए खास बंदूक देने का झांसा दिया। इंस्टाग्राम पर इसका फोटो देख बच्चे ने ऑर्डर दे दिया। कीमत 800 रुपये लिखी थी। ईलू ने कहा, पेमेंट के लिए पापा के डेबिट कार्ड का फोटो खींचकर भेज दो। इसके बाद फोन नंबर भी ले लिया और खाते से 2.76 लाख रुपये निकाल लिए। अन्य बच्चों से भी इसी तरह ठगी की है।
ठगी की रकम से करता था मौज-मस्ती
पुलिस ने बताया कि ईलू ने ठगी की रकम से ही सोने की चेन खरीदी। वह ब्रांडेड कपड़े, घड़ी भी खरीद चुका है। ठगी से जो रकम मिलती, उसे मौज मस्ती पर खर्च करता।
ठगी का शिकार होने पर बना ठग
1. पुलिस पूछताछ में ईलू ने बताया कि वह खुद भी पबजीए टेंपल रन और बैटल गेम खेलता था। उसे औजार बेचने के नाम पर किसी ने उससे 200 रुपये की ठगी कर ली। इसी से उसे आइडिया मिल गया।
2. उसने इंस्टाग्राम पर वेबपेज बनाया, उस पर टूल सजाए और बेचने के नाम पर ठगी करने लगा।
3. बच्चों से कहता था कि पेमेंट बहुत आसान है, बस पापा के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का फोटो व्हाट्सएप पर भेजना है। इसमें जितने पैसे होते, उतने निकाल लेता।
4. बच्चों से पापा का मोबाइल नंबर भी ले लेता था। खाते से रकम निकालने के बाद अपना नंबर ब्लॉक कर देता था। नए शिकार के लिए नया मोबाइल नंबर इस्तेमाल करता था। गेम खेलने का पता चल जाने के डर से ज्यादातर बच्चे माता-पिता को बताते ही नहीं थे।
घरवालों को बताया, बहुराष्ट्रीय कंपनी में लग गई है नौकरी
मास्टरमाइंड विशांत उर्फ ईलू हर तीन-चार महीने बाद अपने घर आता था, वह भी सिर्फ दो-तीन दिन के लिए। आंवला के उसैत गांव में उसका पैतृक आवास है। कुछ समय पहले आंवला में ही फूटा दरवाजा पर उसके पिता ने नया मकान बनाया है। विशांत के घर के आसपास रहने वालों के मुताबिक घर आने पर भी ईलू किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। मोहल्ले में यह भी किसी को नहीं पता था कि वह कहां रहता है और क्या करता है। हालांकि परिवार को उसने बता रखा था कि उसकी बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी लग गई है।
भाई, दो बहनों के साथ माता-पिता हैं परिवार में
आरोपी ईलू के परिवार में पिता शिवचरन लाल, मां मुन्नी देवी के साथ एक भाई और दो बहनें हैं। इनमें एक बहन की शादी हो चुकी है जबकि दूसरी बहन शहर में रहकर कॉम्पटीशन की तैयारी कर रही है। विशांत की गिरफ्तारी की खबर आने के बाद उसके परिवार के लोग भी घर में ताला लगाकर कहीं चले गए। हालांकि आसपास के ंलोगो के मुताबिक उनके किसी परिचित की तबीयत खराब हुई है जहां पूरा परिवार गया हुआ है।
आयुर्वेदिक अस्पताल में वार्ड ब्वाय हैं पिता
आरोपी ईलू के पिता शिवचरन लाल आयुर्वेदिक अस्पताल में वार्ड ब्वाय हैं। गांव के लोगों का कहना है कि पिता का व्यवहार शुरू से ही काफी अच्छा है। उनका गांव के साथ आसपास के लोगों से काफी अच्छा मेलजोल है। वह जरूरत पड़ने पर गांव के लोगों की काफी मदद भी करते हैं। शरीफ बाप का बेटा उनसे पूरी तरह उलट निकला और ठगी का मास्टरमाइंड बन गया।