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Bareilly News: खून की कमी और कुपोषण से जूझ रहीं 40 फीसदी गर्भवती, कैसे जन्म लेंगे स्वस्थ बच्चे

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बरेली। सरकारी अस्पताल, पोषण पुनर्वास केंद्र और निजी अस्पतालों में जांच के लिए पहुंच रहीं कई गर्भवती एनिमिक मिल रही हैं। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में इन्हें दर्ज कर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर गर्भवतियों को पोषाहार की जरूरत बता रहे हैं।
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चिकित्सकों के मुताबिक, मां ही गर्भ में पल रहे शिशु के सेहत की जिम्मेदार होती है। लिहाजा, मां कुपोषित या एनिमिक हुई तो बच्चे की सेहत प्रभावित होती है। औसतन करीब 40 फीसदी गर्भवती इनसे पीड़ित हैं।
परामर्श के बाद 35 फीसदी गर्भवती खानपान और जीवनशैली में बदलाव करती हैं ताकि शिशु स्वस्थ रहे। किन्हीं वजहों से पांच फीसदी की सेहत में अनुमान के अनुसार सुधार नहीं होता। इससे उनके प्रसव के दौरान जोखिम की आशंका होती है। दूसरी ओर, जन्म के बाद बच्चों को एनआईसीयू, वॉर्मर में रखा जाता है।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक, बीते वर्ष करीब सात हजार प्रसव हुए। इसमें करीब डेढ़ हजार सिजेरियन रहे। इनमें 40 फीसदी महिलाएं एनिमिक रहीं। 230 गर्भपात हुआ। करीब छह सौ बच्चे गंभीर रहे। दो सौ को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।

मां के गर्भ से हो जाती है कुपोषण की शुरुआत
वरिष्ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रगति अग्रवाल के मुताबिक अगर गर्भवती माताएं कुपोषित हैं तो उनके गर्भ में पल रहा बच्चा भी कुपोषित होता है। कुपोषण माताओं में एनीमिया का भी बड़ा कारण है। डॉ. त्रिभुवन के मुताबिक अगर मां कुपोषित हैं या कोई गंभीर रोग है तो कई बार बच्चा गर्भ में ही दम तोड़ देता है। समय से पूर्व प्रसव समेत अन्य दिक्कतें होने की आशंका रहती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क जांच गर्भवती को करानी चाहिए।

भोजन में गर्भवती जरूर खाएं पांच चीजें
विटामिन के लिए हरी सब्जी, कार्बोहाइड्रेट के लिए रोटी, प्रोटीन के लिए दाल, खनिज तत्वों के लिए ताजे फल के साथ ही संपूर्ण आहार के तौर पर दूध का सेवन करें। गर्भावस्था के दौरान खानपान का कोई खास परहेज नही होता। फिर भी विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होगा। अमर उजाला ब्यूरो
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