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पुजारियो! यहां अब कोई निर्माण न करना भारत सरकार की संपत्ति है धोपा मंदिर

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बरेली। कैंट के धोपेश्वरनाथ मंदिर की भूमि की मिल्कियत को लेकर शुरू हुए विवाद के दूसरे दिन कैंट बोर्ड की ओर से मंदिर पर नोटिस चस्पा कर दिया गया जिसमें मंदिर की संपत्ति को भारत सरकार के अधीन बताया गया है। नोटिस के मुताबिक यह भूमि कैंट के जीएलआर यानी जनरल लैंड रजिस्टर में दर्ज है, लिहाजा यहां कोई भी तोड़फोड़ या नया निर्माण कैंट बोर्ड की अनुमति के बगैर नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। नोटिस चस्पा होने के बाद मंदिर के पुजारियों में हड़कंप मच गया है।
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बुधवार को मंदिर में चल रहे निर्माण को रुकवाने पहुंची अधिकारियों की टीम से मंदिर के पुजारियों की तीखी नोंकझोंक हुई थी। पुजारियों ने मंदिर पर मालिकाना हक जताते हुए निर्माण रोकने पर आपत्ति जताई थी मगर कैंट बोर्ड की टीम ने न सिर्फ निर्माण रुकवा दिया बल्कि भविष्य में बगैर अनुमति कोई भी निर्माण कराने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दे दी थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से थाना कैंट में शिकायत भी दर्ज करा दी गई। इस मामले में गुरुवार को कैंट बोर्ड की सीईओ के आदेश पर अधिकारियों ने मंदिर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया। जिसमें बी-3 लैंड पर स्थापित मंदिर को ओल्ड ग्रांट शर्तों के तहत कैंट बोर्ड के प्रबंधन में बताया है। इसके तहत प्रतिबंधित परिसर में निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए कैंट एक्ट 2006 के प्रावधान के तहत कैंट बोर्ड की अनुमति को अनिवार्य बताया गया है। नियमों की जानकारी देने के साथ ही मंदिर परिसर में निर्माण कार्य का प्रयास करने पर अवैध निर्माण कर रहे लोगों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी है।

फिर बना ली कैंट बोर्ड की हटाई दुकान
धोपा मंदिर में बुधवार को जिस दुकान का निर्माण रुकवाकर उसे हटा दिया गया था, बृहस्पतिवार को मंदिर के पुजारियों ने कैंट बोर्ड की रोक के बावजूद उसी जगह फिर दुकान बनाकर तैयार करा दी। हालांकि इस बार उन्होंने टिन शेड और लोहे की पाइप के बजाय बांस और तिरपाल का प्रयोग किया है। पुजारिन चंचल गोस्वामी ने कैंट बोर्ड के नोटिस को अधिकारियों का मनमाना रवैया बताया है और मंदिर की भूमि पर पुजारियों का अधिकार बताया है। बता दें कि मंदिर परिसर में दुकानों के साथ बाहर भी पुजारियों की दुकानें लगी हुई हैं जिन पर वे पूजन सामग्री का विक्रय करते हैं।
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मंदिर पर भारत सरकार का स्वामित्व है जो कैंट बोर्ड के जीएलआर में दर्ज है। मंदिर में नोटिस चस्पा करा दिया है। प्रशासनिक कार्यों के लिए साल 2010 में ट्रस्ट को मान्यता मिली है। मंदिर परिसर में बिना अनुमति निर्माण कार्य कराने पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
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- आरके माहेश्वरी, अधिशासी अभियंता, कैंट बोर्ड
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