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वुडरो स्कूल की मनमानी- सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश दरकिनार, विधवा की बेटियों को थमाया निष्कासन का नोटिस

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बरेली। स्कूलों की मनमानी का बार-बार खुलासा करने के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी। मगर, विधवा की बेटियों की मदद के लिए सिटी मजिस्ट्रेट ने वुडरो स्कूल की प्रधानाचार्य को पत्र लिखा तो निजी स्कूलों की मनमानी का सारा कच्चा चिट्ठा खुलकर सामने आ गया। स्कूल प्रबंधन ने गरीब छात्राओं की मदद के बजाय फीस न जमा करने पर उन्हें स्कूल से निष्कासन का नोटिस थमा दिया। विधवा की शिकायत पर सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला प्रोबेशन अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी के साथ स्कूल का निरीक्षण किया तो वहां तमाम खामियां सामने आईं। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रधानाचार्य को आठ बिंदुओं पर नोटिस देकर तीन दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त कर जवाब देने को कहा है। साथ ही पूछा है कि क्यों न स्कूल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, बड़ा बाजार में दर्जी चौक निवासी पूजा शर्मा के पति बालेश शर्मा की जनवरी में मौत हो चुकी है। उनकी बेटियां तनिष्का, वंशिका और कनिष्का वुडरो स्कूल सिविल लाइंस में क्रमश: कक्षा चार, केजी और प्री नर्सरी में पढ़ती हैं। पति की मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही पूजा ने स्कूल की प्रधानाचार्य को पत्र लिखकर एक बच्चे की फीस माफ करने का अनुरोध किया, मगर स्कूल से कोई मदद नहीं मिली। इस पर उन्होंने 28 मार्च को सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात की और अपनी समस्या बताई तो उन्होंने प्रधानाचार्य को पत्र लिखकर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत उनकी मदद करने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर आर्थिक कारणों से बच्चियों की पढ़ाई छूटी तो कार्रवाई की जाएगी। मगर, स्कूल प्रबंधन ने मदद करने के बजाय फीस जमा न होने पर छात्राओं को निष्कासन का नोटिस थमा दिया। पूजा ने दोबारा सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की तो बृहस्पतिवार को वह जिला प्रोबेशन अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी के साथ जांच करने पहुंचे तो वहां तमाम खामियां निकलकर सामने आईं। स्कूल में पठन-पाठन से लेकर बच्चों के खेलकूद तक कोई इंतजाम नहीं मिली। पाठ्यक्रम और फीस को लेकर भी मनमानी सामने आई तो उन्होंने आठ बिंदुओं पर प्रधानाचार्य को नोटिस दे दिया।

नोटिस के बिंदु
- विद्यालय को एक स्थान पर मान्यता दी गई है लेकिन आपने मौखिक रूप से स्वीकार किया है कि पांच अन्य शाखाएं संचालित की जा रही हैं जो अत्यंत गंभीर एवं नियम विपरीत है।
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- विद्यालय संचालन हेतु आधारभूत सुविधाएं जैसे कि खेल का मैदान, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, पार्किंग व्यवस्था आदि मानक के अनुरूप नहीं है।
- शिक्षकों की योग्यता और शिक्षक-छात्र अनुपात भी मान्यता की शर्तों के अनुरूप नहीं है।
- विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों से संबंधित व्यवस्थाएं भी शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत नहीं हैं।
- शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(1)सी के अंतर्गत समाज के पिछड़े, निर्बल एवं आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग के कम से कम 25 प्रतिशत छात्रों को प्रत्येक विद्यालय में अनिवार्य रूप से शिक्षा ग्रहण कराने का प्रावधान है। मगर, आपके विद्यालय में ऐसे एक भी छात्र का संदर्भ जांच के दौरान नहीं दिया गया।
- अभिभावकों को बोर्ड द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रम तथा मानक पुस्तकों से इतर निजी प्रकाशकों की अधोमानक पुस्तकें अपेक्षाकृत महंगे दामों पर खरीदने हेतु विवश किया जा रहा है।
- शासन के निर्देशों के विपरीत विद्यालय की फीस और अन्य शुल्क मानक से विपरीत लिए जा रहे हैं।
- आपसे आरटीई-2009 के संदर्भ में जानकारी एवं प्रपत्र मांगने पर कोई प्रपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।

तीन दिन में दो जवाब.. क्यों न कराई जाए रिपोर्ट
वुडरो स्कूल की प्रधानाचार्य को आठ बिंदुओं पर दिए नोटिस में सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा है कि स्कूल स्पष्ट रूप से आरटीई के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। आरटीई की व्यवस्थाएं दुरुस्त करके तीन दिन में उन्हें अवगत कराया जाए। साथ ही पूजा शर्मा और उनकी बेटियों के मानसिक उत्पीड़न पर और 28 मार्च को दिए उनके पत्र का जवाब देने पर भी स्पष्टीकरण दें। सिटी मजिस्ट्रेट ने नोटिस में कहा है कि क्यों न इन सब अनियमितताओं में आपके विरुद्ध आईपीसी की धारा 175, 176 और 188 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराकर वैधानिक कार्रवाई की जाए। वहीं, इस संबंध में पक्ष जानने के लिए स्कूल की प्रधानाचार्य पी वाणी को फोन किया गया तो कॉल रिसीव नहीं हुई। मेसेज किया तो उसका भी कोई जवाब नहीं आया।

आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं की मदद के लिए वुडरो स्कूल को पत्र लिखा गया। मगर, उन्होंने मदद के बजाय निष्कासन का नोटिस दे दिया। इस पर स्कूल का निरीक्षण किया तो वहां तमाम खामियां मिली हैं। आठ बिंदुओं पर नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। - संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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