फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस घंटे बाद आए राजीव गांधी, फिर भी नहीं हिली भीड़

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। 1984 का आखिरी महीना, फरीदपुर के रामलीला मैदान में रामलीला नहीं चल रही है फिर भी आधी रात से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद कड़कड़ाती सर्दी में हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी है। हर तरफ कांग्रेस के झंडे-बैनर लगे हैं लेकिन लोग उनसे बेखबर वीसीआर पर ‘शोले’ देखने में मशगूल हैं। लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, बेचैन से दिख रहे कांग्रेस के प्रत्याशी कल्याण सिंह सोलंकी भी इसी भीड़ का हिस्सा हैं। कभी उनकी निगाह सड़क की ओर उठती तो कभी कलाई पर बंधी घड़ी पर आकर टिक जाती। धीरे-धीरे घड़ी की सूइयां ने तीन पर पहुंच गई, तभी सड़क पर कार की घरघराहट सुनाई दी और फिर शोर मच गया राजीव गांधी आ गए। राजीव गांधी जिनका चुनावी जनसभा के लिए शाम से इंतजार हो रहा था, रात के तीन बजे पहुंचे और तब जनसभा हुई। इसी जनसभा में आंवला में कोई बड़ा उद्योग लगाने की मांग उठी थी और फिर इसी मांग की बुनियाद पर कई साल बाद आंवला में इफको की स्थापना हो पाई।
विज्ञापन

कल्याण सिंह सोलंकी को नजदीक से जानने वाले लोगों के जहन में अब भी वो खून जमा देने वाली सर्दी की वो रात यादगार है। 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की कमान राजीव गांधी के हाथों में दी गई थी और वह देश भर में दौरे कर रहे थे। हवाई यात्राओं की आज जैसी सुविधा न होने की वजह से उनकी ज्यादातर चुनावी सभाओं का घोषित समय घंटों पीछे छूट जाता था। चुनाव आयोग की पाबंदियां कम थीं, इसलिए रातों में भी सभाएं होती थीं। फरीदपुर की चुनावी जनसभा में यही हुआ था। सभा का समय शाम को था, लेकिन राजीव गांधी रात तीन बजे पहुंच पाए। वीसीआर उस दौर की नई ईजाद था, लिहाजा शाम ढलने के बाद अंधेरा घिरा तो लोगों को रोके रखने के लिए सभास्थल पर वीसीआर मंगा लिया गया। आधी रात के बाद तक लोगों को फिल्में दिखाकर रोका गया। राजीव गांधी ज्यादातर सभाओं में कार से पहुंचते थे। फरीदपुर की जनसभा में वह 12 घंटे की देरी से पहुंचे थे। कल्याण सिंह सोलंकी ने इसी सभा में राजीव गांधी से क्षेत्र के विकास और लोगों को रोजगार देने के लिए आंवला में कोई बड़ा उद्योग लगाने की मांग की थी। मंच पर ही राजीव गांधी ने इसके लिए हामी भर दी। कुछ सालों बाद यही मांग आंवला में इफको स्थापित होने का कारण बनी। कल्याण सिंह सोलंकी ने चुनाव जीतकर सांसद बनने के बाद भी पैरवी जारी रखी। प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी ने 1987 में आंवला में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कराई। 1989 में खुद इफको की नींव रखने आंवला पहुंचे। 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल ने इफको का विस्तार किया।

चुनाव हारने के बाद दिनदहाड़े कर दी गई थी हत्या
सांसद रहे कल्याण सिंह के बेटे कमल पाल सिंह बताते हैं कि उनके पिता 1984 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद और कोई चुनाव नहीं जीत पाए। घरेलू विवाद बढ़े तो उनका राजनीतिक जीवन तबाह हो गया और फिर इन्हीं विवादों के कारण 15 जनवरी 1992 को थाना प्रेमनगर थाना के पास उनके कुछ करीबियों ने ही दिनदहाड़े उनकी हत्या कर दी। कल्याण सिंह की हत्या के बाद सरकार की ओर से उनके परिवार को गैस एजेंसी दे दी गई तो उन लोगों ने उस पर भी उनका कब्जा नहीं होने दिया। रंजिश बढ़ती गई और फिर उनके भाई देवेंद्र सिंह की भी हत्या कर दी। देवेंद्र की शादी को सवा साल ही हुआ था। देवेंद्र की पत्नी रंजना और उनके नवजात शिशु के लिए भी जान का खतरा पैदा हो गया। तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री संतोष गंगवार ने हस्तक्षेप किया तो बमुश्किल उन्हें गैस एजेंसी की मिल्कियत हासिल हो पाई।
विज्ञापन


शादी के बाद संघर्ष में गुजर गए जीवन के तमाम साल
कल्याण सिंह सोलंकी की पुत्रवधू रंजना सोलंकी को कम उम्र में ही पति की हत्या के बाद लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब वह खुद गैस एजेंसी चलाती हैं। भाजपा से जुड़ी रंजना अब भी पुराने दौर की यादों से सिहर जाती हैं। कहती हैं, मेरे ससुर को जनता आज भी याद करती है जो इस बात का प्रमाण है कि वह अपने दौर में कितने लोकप्रिय रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें