खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आध्यात्मिक गुरु बताकर कुछ दिन पहले तक मंत्री जैसा प्रोटोकॉल पाने वाला पुलकित महाराज सोमवार को आम कैदी की तरह नजर आया। अपनी हिरासत में उसे लेकर बरेली पहुंची दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम पूरे दिन यहां उसके कारनामों की जांच करती रही। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में उसे दो घंटे से ज्यादा समय तक बैठाकर उसकी जालसाजी के रिकॉर्ड की छानबीन की गई। क्राइम ब्रांच उसे लेकर सर्किट हाउस पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस भी लेकर पहुंची जहां कई बार बरेली आने पर उसे ठहराया जाता था। सर्किट हाउस में छानबीन के दौरान पता चला कि अफसरों ने उसे यहां ठहराकर वीवीआईपी प्रोटोकॉल जरूर दिया, लेकिन यहां के रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नहीं था।
कथक गुरु पुलकित महाराज को लेकर दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम सोमवार सुबह 10 बजे कलक्ट्रेट पहुंची। क्राइम ब्रांच ने सबसे पहले सिटी मजिस्ट्रेट से पुलकित महाराज के बरेली आने और प्रशासन की ओर से उसके कार्यक्रम कराए जाने के संबंध में सूचनाएं जुटाईं। सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर में दो घंटे से ज्यादा समय तक पुलकित महाराज को बैठाए रखने के बाद क्राइम ब्रांच उसे सर्किट हाउस ले गई जहां जेई और स्टाफ से वह रजिस्टर मांगा जिसमें सर्किट हाउस में रुकने वाले वीवीआईपी के नाम दर्ज किए जाते हैं। सूत्रों की मानें तो सर्किट हाउस के रजिस्टर में पुलकित मिश्रा उर्फ पुलकित महाराज का कहीं नाम नहीं था। क्राइम ब्रांच टीम ने प्रशासनिक अफसरों से यह भी पूछा कि पुलकित महाराज को वीवीआईपी के तौर पर किस अधिकारी ने बरेली में रिसीव किया और मंत्री का प्रोटोकॉल देकर सर्किट हाउस में ठहराया। सर्किट हाउस के बाद क्राइम ब्रांच उसे पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस भी ले गई। वहां देर शाम तक टीम पुलकित महाराज को लेकर रुकी रही। उसी के सामने स्टाफ से पूछताछ की गई। क्राइम ब्रांच ने पुलकित महाराज को लाने की योजना पूरी तरह गुप्त रखी। दोपहर को मी़िडया वालों को भनक लगी तो वे कलक्ट्रेट में इकट्ठे हो गए लेकिन पुलकित महाराज को मीडिया से दूर ही रखा गया।
बता दें कि दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पुलकित महाराज को 28 सितंबर को गाजियाबाद के साहिबाबाद से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ खुद को अलग-अलग मंत्रालयों का अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाएं लेने की शिकायत की गई थी, जिसकी एक महीने तक जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने उसकी गिरफ्तारी का फैसला लिया था। पुलिस अधिकारियों को जांच में पता चला था कि पुलकित महाराज खुद को कभी प्रधानमंत्री का आध्यात्मिक गुरु बताकर तो कभी अधिकारियों को फर्जी लेटरहेड भेजकर सरकारी सुविधाएं लेता था।