बरेली। कृषि विभाग में मृदा परीक्षण ही नहीं, बल्कि गेहूं और दलहन के अलावा मूंगफली के बीज वितरण में भी करोड़ों का गोलमाल है। आत्मा और बीज ग्राम योजना में अफसर और कर्मचारी किसानों को मुफ्त बीज न देकर बड़े पैमाने पर सरकारी बजट चंद चुने हुए किसानों या अपने दलालों के खाते में डीबीटी भेजकर मोटी रकम खुद ही हड़प गए। शासन से करोड़ों के घोटाले में बड़े अफसरों के अलावा सालों से एक ही पटल पर जमे तीन बाबुओं पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं। इन सब पर इसी महीने बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
आत्मा योजना- वर्ष 2017-18 में योजना में प्रत्येक ब्लाक में किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 किलो की बोरी में गेहूं का बीज मुफ्त बांटने के लिए आया था। प्रति बोरी बीज की कीमत एक हजार रुपये थी। 15 ब्लाकों में प्रदर्शन कराकर छह लाख का बीज प्राइवेट दुकानों पर चला गया। किसानों को एक भी बोरी मुफ्त बीज नहीं मिला। इसी योजना में दो फार्म स्कूल प्रति ब्लाक दो हेक्टेयर भी किसानों को मुफ्त बांटे जाने थे। 15 ब्लाकों में 30 हेक्टेयर जमीन पर प्रति बोरी 1000 रुपये कीमत में लगभग 30 लाख लागत के बीज का गोलमाल कर लिया गया। वर्ष 2018-19 में भी लगभग इतनी ही रकम का घपला होने पर यह रकम 72 लाख बैठती है। तीन साल में बीज वितरण के नाम पर 2.10 करोड़ का गोलमाल कृषि विभाग में किया गया।
एक भी कलस्टर नहीं लगा
राष्ट्रीय खाद्य मिशन (एनएफएसएम) उड़द, चना, मसूर और मूंगफली के बीज भी प्रति ब्लाक 50-50 हेक्टेयर में बुवाई के लिए शासन से आए थे। 15 ब्लाकों में 750-750 हेक्टेयर हेक्टेयर जमीन पर उड़द, चना, मसूर और मूंगफली के बीज किसानों को सब्सिडी पर देने थे। तीन ब्लाकों में 100-100 हेक्टेयर का कलक्टर लगना था। कृषि विभाग के तीन बाबुओं ने अफसरों को गुमराह कर एक भी कलस्टर नहीं लगने दिया। बीज प्रभारी ने उड़द, चना, मसूर और मूंगफली का बीज किसानों को सब्सिडी पर न देकर उसे प्राइवेट दुकानदारों को बेच दिया। दलालों के नाम पर सब्सिडी उनके खातों में भेजकर उसमें बड़े पैमाने पर बंदरबांट कर लिया गया। उड़द के रेट 8200 रुपये प्रति क्विंटल थे, जिसे दुकानो ंपर 9300 रुपये प्रति क्विंटल बेचा गया। फर्जी किसानों के खातों में 50 प्रतिशत सब्सिडी भेजकर अफसर और कर्मचारियों ने करोड़ों का कई हिस्सों में बंदरबांट किया।
बहुत सी चीजें मेरी जानकारी में नहीं हैं। इतना बड़ा विभाग है। हो सकता है कि कहीं पर गड़बड़ी हो गई हो। मैं बीज वितरण की पात्रता के साथ उन किसानों के खातों की भी जांच कराऊंगा, जिनमें सब्सिडी भेजी गई है। - विनोद कुमार, उप निदेशक कृषि