उड़द खरीद घोटाला
खुद को असली बताने वाले किसान भी निकले नकली
पोर्टल पर शिकायत के बाद एसडीएम आंवला ने की थी जांच
घोटाला पकड़े जाने के बाद लगी 6.6 करोड़ के पेमेंट पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। उड़द खरीद घोटाला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने 6.60 करोड़ के पेमेंट पर रोक लगा दी थी। इसमें तमाम किसानों ने खुद को पात्र बताते हुए न केवल भुगतान की मांग की थी, बल्कि सरकार के पोर्टल पर इसकी शिकायत भी दर्ज कराई थी। डीएम के आदेश पर एसडीएम आंवला ने इस मामले की फिर से जांच की तो शिकायत करने वाले किसान फर्जी निकले। लिहाजा प्रशासन ने किसानों के पेमेंट पर लगी रोक बरकरार रखी है।
जनवरी में आंवला में पीसीएफ संस्था के दो सेंटरों पर उदड़ खरीद हुई थी। इसके लिए 5600 रुपये क्विंटल का रेट निर्धारित था। इसकी शिकायत हुई तो जांच में यह सामने आया कि किसानों के फर्जी नाम से खरीद कर ली गई। इस मामले में पीसीएफ के जिला प्रबंधक और दोनों सेंटर इंचार्ज सहित छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इधर, कुछ किसानों ने यह दावा किया कि वे पात्र हैं लेकिन फर्जी लोगों के साथ उड़द खरीद का उनका भी पेमेंट रोक दिया गया है। किसानों के सीएम के पोर्टल पर शिकायत करने के बाद डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने मामले की दोबारा जांच एसडीएम आंवला से कराई। इसमें इस बात की तस्दीक हुई कि शिकायत करने वाले सभी किसान फर्जी है, इसलिए पेमेंट की कोई गुंजाइश नहीं है। इस संबंध में सहायक निबंधक सहकारिता वीर विक्रम सिंह ने बताया कि इस मामले की विस्तृत जांच और उस आधार पर कार्रवाई पहले ही हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि कुछ किसानों की शिकायत पर एसडीएम आंवला भी जांच पूरी कर चुके हैं। उन्होंने शिकायतकर्ता किसानों के फर्जी होने की जानकारी दी है।