फ्लैग- योगी सरकार में किसानों का हाल
गन्ना कटे तो बिटिया जाए ससुराल
- बकाया मिला नहीं, पर्चियां चबा गए दलाल, किसानों का बुरा हाल
- क्यारा के बिजेंद्र ने डीएम को सुनाई पीड़ा, 12 मई को शादी, मगर अब तक भुगतान नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। गन्ना किसान की बेटी की 12 मई को शादी है। चीनी मिल पर 1.5 लाख का बकाया है। आठ बीघे खेत में गन्ना खड़ा है। न उस गन्ने की पर्चियां किसान तक पहुंच रही हैं, न ही बकाया भुगतान हो पा रहा है। टाइम से किसान को गन्ने का बकाया मिलने पर ही उसकी बेटी ससुराल जा पाएगी। डीएम ने भी किसान की पीड़ा सुनकर जल्द बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैँ।
ब्लाक क्यारा के गांव जगतपुर में रहने वाले बिजेंद्र की बहन की 12 मई को शादी है। बिजेंद्र के पिता का फरीदपुर स्थित चीनी मिल पर 1.5 लाख का बकाया है। सीजन में इनकी 40 पर्ची आनी थीं, लेकिन 14 पर्चियां ही आईं। इनका आरोप है कि उनकी बाकी पर्चियां बिचौलिए और दलाल ले गए। अभी भी खेत में आठ बीघा गन्ना खड़ा है। अगर 12 मई से पहले पर्चियां नहीं आईं और चीनी मिल ने बकाया भुगतान नहीं मिला तो उनकी बिटिया की शादी में व्यवधान पैदा हो सकता है। खेत में खड़ा गन्ना सूख रहा है। चीनी मिल से पर्ची नहीं आ रही। बिजेंद्र ने बताया कि उनके पिता के नाम जमीन है। वह अपना बहुत सा गन्ना पर्ची न आने की वजह से कोल्हू पर भी 140 रुपये प्रति क्विंटल बेच चुके हैं क्योंकि बेटी की शादी की तैयारी के लिए सामान खरीदना था। मगर, अब चीनी मिल के बकाया न देने पर उनकी बिटिया ससुराल नहीं पहुंच पाएगी। सब कुछ गन्ना बकाया भुगतान मिलने के ऊपर है। एक तरफ इनका गेहूं कट रहा है। परिवार का पूरा ध्यान गेहूं काटकर घर पहुंचाने पर है, वहीं दूसरी ओर गन्ना खेत में सूख रहा है। यह अकेले ऐसे किसान नहीं हैं, चीनी मिलों से जिनका बकाया नहीं मिला है। लाखों की संख्या में किसानों का चीनी मिलों पर अरबों रुपया बकाया है। चीनी मिल गन्ना खरीद बंद कर चुके हैं , लेकिन मार्केट में चीनी सस्ती बिकने की आड़ में किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो पा रहा। बता दें कि योगी सरकार ने चीनी मिलों को गन्ने का बकाया 14 दिन के अंदर भुगतान करने की हिदायत दे रखी है, मगर मिल प्रबंधन सरकार के इस आदेश का पालन नहीं कर रहे।
कोट--
जिस किसान की बेटी की शादी है, वह जनता दर्शन में भी आकर मुझसे मिला था। मैने उस पर डीसीओ को तुरंत बकाया भुगतान कराने के आदेश दिए थे। अगर उसे अब भी बकाया भुगतान नहीं मिला है तो वह स्वयं आकर शिकायत कर सकता है। अन्यथा जनता दर्शन के रजिस्टर से बिजेंद्र का मोबाइल नंबर निकलवाकर उसका गन्ना भुगतान कराया जाएगा। मैं इसमें व्यक्तिगत मदद भी करने को तैयार हूं। वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
फोटो- गन्ने की ट्रालियां
गन्ना खेत में, चीनी मिलें बंद
- मीरगंज, नवाबगंज के बाद बहेड़ी मिल में पेराई सत्र पूरा
- मिल प्रबंधन का दावा नहीं मिल रही गन्ने की सप्लाई
बरेली। खेतों में अभी लाखों क्विंटल गन्ना खड़ा है, लेकिन चीनी मिल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें पेराई क्षमता के अनुसार गन्ने की सप्लाई नहीं मिलने से मिल बंद करना पड़ रही है। सोमवार शाम बहेड़ी केसर चीनी मिल 1.04 करोड़ कुंतल रिकार्ड पेराई के साथ बंद हो गई। इससे पहले मीरगंज और नवाबगंज मिलें बंद हो चुकी है।
गन्ना विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बहेड़ी केसर चीनी मिल बंद हो चुकी है। मीरगंज चीनी मिल पिछले हफ्ते ही बंद हो चुकी है। द्वारिकेश चीनी मिल फरीदपुर के पास 10 लाख क्विंटल से ऊपर का गन्ना बाकी पड़ा है। यह चीनी मिल 10 से 15 मई के बीच में बंद होने का नोटिस दे चुकी है। चीनी मिल गेट पर अभी भी गन्ना बेचने आने वाली ट्रैक्टर ट्रालियों की दो से तीन किलोमीटर तक लंबी लाइनें लग रही हैँ। सेमीखेड़ा चीनी मिल पर भी पांच लाख क्विंटल से ज्यादा गन्ना बचा है। 19 में से चीनी मिल पांच सेंटर बंद कर चुकी है। 10 मई तक चीनी मिल बंद होने की बात कही जा रही है, हालांकि चीनी मिल केवल नाम मात्र का ही गन्ना खरीद रही है। नवाबगंज चीनी मिल 22 अप्रैल को ही बंद हो चुकी है। इन चीनी मिलों पर अरबों रुपये गन्ना भुगतान का बकाया है। किसानों को 14 दिन के अंदर भुगतान करने के नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।
पिछले कई दिनों से गन्ने की सप्लाई कम मिल रही थी। सोमवार को बमुश्किल 15 हजार क्विंटल गन्ने की तोल हुई। इसकी पेराई करने के बाद शाम चार बजे चीनी मिल बंद कर दी गई। शरद मिश्र, उपाध्यक्ष केसर चीनी मिल बहेड़ी