डीएम डा. पिंकी जोवल के जाते ही ट्रांसपोर्ट नगर बसाने का मामला एक बार फिर से लटक गया। इससे पहले डीएम सुरेंद्र सिंह और पंकज यादव ने भी ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की पहल की थी। इससे पहले ये पहल अंजाम तक पहुंचती, दोनों जिलाधिकारियों का ट्रांसफर हो गया। मंडलायुक्त पीवी जगनमोहन ने बीडीए को हिदायत थी कि 31 मई तक हर हाल में ट्रांसपोर्ट नगर की समस्त अव्यवस्थाएं ठीक हो जाएं और शहर के समस्त ट्रक ट्रांसपोर्ट नगर में खड़े नजर आएं। मगर, ये तारीख भी निकल गई लेकिन बीडीए बोर्ड से प्रस्ताव स्वीकृत होने की देरी के चलते टीपीनगर का मामला टलता रहा।
बीडीए बोर्ड ने 28 जून को शाहजहांपुर रोड पर रजऊ परसपुर के निकट प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर योजना में मैकेनिकों को 15 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से छोटे-छोटे प्लाट देने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इसी बीच ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की पहल करने वाली जिलाधिकारी डा. पिंकी जोवल का ट्रांसफर हो गया। नए डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह का रुख इस मामले में सामने नहीं आया है। बीडीए ने मैकेनिकों को प्लाट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। दूसरी ओर बारिश के बाद ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों, पार्किंग और खाली प्लाटों में पानी भर गया है या ये स्थान फिर से दल-दल बन चुके हैं। ट्रांसपोर्ट नगर में तीन सौ से चार सौ ट्रक खड़े होते हैं। लेकिन इनका आवागमन शहर के अंदर भी होता रहता है। ट्रांसपोर्टर्स ये कहकर अपने ट्रक टीपी नगर में नहीं ले जा रहे कि वहां बीडीए ने सड़क, बिजली, पानी, पार्किंग की सुविधा ठीक से विकसित नहीं की। प्लाट आवंटन न पाने से पार्किंग और खाली जमीन पर अनाधिकृत मैकेनिकों का कब्जा भी नहीं हट पा रहा।
1998 में शुरू हुई थी योजना
बरेली विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र काउंटर मैगनेट बरेली सिटी योजना में शाहजहांपुर रोड पर 24.89 हेक्टेयर जमीन पर 1996-97 में ट्रांसपोर्ट नगर योजना शुरू की थी। 2001-02 में 1074 प्लाट आवंटित किए गए। इनमें केवल 1067 भूखंडों का आवंटन हो पाया लेकिन कब्जा 1041 को ही मिला। तत्कालीन नगर विकास मंत्री लालजी टंडन ने शिलान्यास किया था। इसके बाद ये योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
ज्यादातर प्लाट खाली
बीडीए ने 18 भूखंडों पर पेट्रोल पंप, ढाबा, धर्मकांटा, डिस्पेंसरी, बिजनेस सेंटर, सर्विस सेंटर, फायर स्टेशन, पुलिस स्टेशन, कम्यूनिटी हाल, आरटीओ दफ्तर के लिए रखे थे। इनमें से कोई भी भूखंड आबाद नहीं हो पाया। ट्रांसपोर्टर्स के नाम पर प्रापर्टी डीलर और रियल स्टेट से जुड़े लोगों ने बीडीए से सस्ते प्लाट खरीद लिए। अधिकांश प्लाट खाली पड़े हैं क्योंकि कारोबारी महंगे दामों पर प्लाट बेचकर मुनाफा कमाना चाहते हैं। वह निर्माण में रुचि नहीं ले रहे। इस वजह से टीपी नगर बसाने का काम 17 साल में भी आगे नहीं बढ़ पाया।