स्टेट यूनिवर्सिटीज में परीक्षा से जुड़े कार्य और परीक्षा का पैटर्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की तर्ज पर कराने की तैयारी है। परीक्षाओं का ई-मूल्यांकन होगा और प्रश्नपत्रों का स्वरूप भी बदला जाएगा। यानी स्नातक, परास्नातक और प्रोफेशनल कोर्स की परीक्षा में वैकल्पिक प्रश्न भी शामिल होंगे या कुछ प्रश्नपत्रों में ही वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएं। इसके पीछे शासन की मंशा है कि मूल्यांकन तेजी से होगा और परिणाम भी समय से जारी हो सकेंगे। पिछले दिनों लखनऊ में हुए कुलपति सम्मेलन में भी विश्वविद्यालय में पढ़ने पढ़ाने का तरीका बदलने और ज्यादा से ज्यादा तकनीक का प्रयोग करने पर जोर दिया गया। इस पर कुलपतियों ने सहमति भी दी है, यानी भविष्य में परीक्षा का पैटर्न बिल्कुल बदलने जा रहा है।
अभी परीक्षा, मूल्यांकन व रिजल्ट जारी करने में चार माह लगते है। अब शासन की मंशा है कि प्रश्नपत्र आनलाइन भेजे जाएं और मूल्यांकन कंप्यूटर के माध्यम से कराया जाए। अगर एक विषय में दो पेपर होते हैं तो एक में वैकल्पिक प्रश्न या दोनों में कुछ प्रश्न वैकल्पिक पूछे जाएं। परीक्षा का पैटर्न बदला जाए, ताकि आसानी से ई-मूल्यांकन हो सके। इसके अलावा प्रमाण पत्रों का रिकार्ड डिजिटल रूप में रखा जाए और छात्रों को भी इसी फार्मेट में प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने डिजिटल लॉकर की योजना पर कार्य करना भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा प्रमाण पत्र जारी करने का फार्मेट भी बदल दिया है। अब फाइनल की ही मार्कशीट मिलेगी। कुलपति ने बताया कि इसके लिए जल्द योजना बनाना शुरू किया जाएगा।
शासन की मंशा है कि विश्वविद्यालय डिजिटलाइज हों। ई-मूल्यांकन और परीक्षा का पैटर्न बदलने पर विचार किया जा रहा है। कुलपति सम्मेलन में भी इस बात पर जोर रहा। इन योजनाओं को लागू कराने के लिए हम अपने स्तर से प्लान तैयार करेंगे। - प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति रुहेलखंड विश्वविद्यालय