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पूरे सत्र फीस पर मचा हल्ला, रिजल्ट निकला जीरो

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बरेली। पूरे शैक्षिक सत्र में स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर हल्ला मचता रहा। कागजी कार्रवाई और बैठकों का दौर चलता रहा। अभिभावक आखिर तक इस उम्मीद में थे कि फीस में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। अब सत्र खत्म होने को है और जिला शुल्क समिति ने भी मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया है। शनिवार से सीबीएसई की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। तमाम अभिभावकों को अपने बच्चों का प्रवेश पत्र फाइन चुकाकर लेना पड़ा। कई अभिभावकों ने डीएम को भी शिकायतें भेजी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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वर्तमान शैक्षिक सत्र 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होगा। मौजूदा सत्र में फीस को लेकर काफी बवाल मचा। फीस के मुद्दे को लेकर सरकार ने अध्यादेश जारी किया, जिसने बाद में कानून का रूप लिया। जिला स्तरीय और प्रदेश स्तरीय समितियां गठित हुईं। स्कूलों से फीस और शिक्षकों के वेतन समेत तमाम रिकॉर्ड लिए गए। जिला शुल्क समिति की पिछली बैठक में डीएम ने सभी रिकॉर्ड का फिर से परीक्षण कर पंद्रह दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। स्कूलों से फिर से दस्तावेज लिए गए। अभिभावकों को उम्मीद थी कि सत्र खत्म होने से पहले कार्रवाई हो जाएगी ताकि नए सत्र में उन्हें मनमानी फीस न चुकानी पड़े।

डीएम को भेजी फाइल, बैठक का समय मांगा
फीस मामले की फाइल अब डीएम को भेजी गई और बैठक का समय मांगा गया है। उम्मीद है कि जल्द बैठक होगी और फीस समायोजन को लेकर कोई आदेश हो सकता है। फीस मामले में स्कूलों के दस्तावेजों का परीक्षण पूरा हो चुका है। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई। अब समायोजन का आदेश होना है।
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मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था, पिछले सप्ताह ही अवकाश से लौटा हूं। फीस की फाइल डीएम को भेजी है। जल्द बैठक का समय मिल जाएगा। उसके बाद फीस समायोजन का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
- डॉ. अचल कुमार मिश्रा, डीआईओएस

समिति के निर्णय की आस में तमाम अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की। मेरे ही स्कूल में कई लाख फीस बकाया है। हम तो कई बार मांग उठा चुके हैं कि समिति निर्णय करे। कम से कम स्कूलों की फीस तो जम हो। अब परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। परीक्षाओं के बाद तो किसी भी अभिभावक को फीस की फिक्र नहीं रहेगी।
- पारुष अरोरा, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन

कई स्कूलों के छात्रों के प्रवेश पत्र रोके। फाइन लेकर फीस जमा कराई। समिति ने दो माह से कुछ नहीं किया। अफसर चाहते तो फीस मुद्दे का अब तक हल निकल आया होता। जबकि 31 मार्च को यह सत्र भी खत्म हो जाएगा।
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- अंकुर सक्सेना, अभिभावक प्रतिनिधि जिला शुल्क समिति
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