बरेली। करीबी रिश्तेदार को सहकारिता के चुनाव जिताने में मदद न करने पर ‘साहब’ काफी समय से नेताजी की आंख की किरकिरी बने हुए थे। चुनाव बाद भी ‘साहब’ ने बिगड़े संबंध सुधारने की कोई कोशिश नहीं की। उल्टे ‘साहब’ के एक रिश्तेदार ने नेताजी के पांव पर पांव रखने जैसी हरकत कर दी। आखिरकार चुनाव से पहले इन अफसर को जिले से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
स्थानांतरित होने वाले इन अधिकारी पर कुछ समय पहले एक नेताजी ने यह दबाव बनाया था कि उनके एक नजदीकी रिश्तेदार को चुनाव जिताना है। इन अफसर ने कोई मदद तो नहीं की, बल्कि शादी के बहाने करीब दस दिनों के लिए अवकाश पर चले गए। नेताजी खून का घूंट पीकर रह गए। तभी से नेताजी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया। ‘साहब’ के उच्चाधिकारी भी उनसे बहुत खुश नहीं थे। हाल ही में एक मामले को लेकर उन्हें अपने उच्चाधिकारी की फटकार भी सुननी पड़ी थी। इसी बीच उनके एक रिश्तेदार ने भी कुछ ऐसी हरकत की जो नेताजी को और ज्यादा नागवार गुजरी। इसी के साथ उनका जिले से बाहर जाना तय हो गया। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला का रिठौरा राशन घोटाले और परसाखेड़ा स्थित आरके राइस मिल से आढ़तियों को जबरन चावल और धान उठवाने के मामले में विवादों में घिरने का मसला भी पंचम तल तक पहुंचा था। इसी के चलते उन्हें भी जिले से जाना पड़ा।