नजूल की जमीन को फ्रीहोल्ड कराए बिना ही नगर निगम 12.5 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण करा रहा है। जमीन फ्रीहोल्ड न होने से बीडीए ने इस भवन का नक्शा भी पास नहीं किया है लेकिन ठेकेदार तेजी से काम करा रहा है। अगर बीडीए से नक्शा पास नहीं हुआ तो आगे चलकर यह प्रोजेक्ट अधर में लटक जाएगा।
सपा शासनकाल में अवस्थापना निधि से करीब 12.5 करोड़ रुपये की लागत से नगर निगम का बहुमंजिला अत्याधुनिक भवन बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था। इसकी कुछ राशि भी शासन से आ गई लेकिन नजूल की जमीन फ्रीहोल्ड न हो पाने के चलते प्रोजेक्ट लटका रहा। इसके बाद नगर निगम में भाजपा की सरकार बनी तो मेयर उमेश गौतम ने नया भवन बनवाने की बात कही। सितंबर में भूमिपूजन कर काम शुरू करा दिया गया। इसे बनाने की जिम्मेदारी गाजियाबाद की फर्म को दी गई है। 1754 वर्ग मीटर एरिया में बन रहा यह भवन तीन मंजिल होगा।
अधर में लटका रह गया फ्रीहोल्ड का प्रस्ताव
सपा सरकार के शासनकाल में नगर निगम ने जमीन को फ्रीहोल्ड कराने के लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव दिया था और यह प्रस्ताव स्वीकृत भी हो गया। तत्कालीन सर्किल रेट के मुताबिक नगर निगम को करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमा करने थे लेकिन राशि के अभाव में मामला अटका तो फिर आगे नहीं बढ़ सका। अब फ्री होल्ड राशि मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार डेढ़ करोड़ रुपये के ज्यादा होगी। यह राशि बचाने के लिए ही नगर निगम ने जमीन को फ्री होल्ड कराए बिना यहां पर काम शुरू करा दिया है।
नक्शा अटका, भुगतान भी फंसेगा
जमीन को फ्री होल्ड कराए बिना नगर निगम के ठेकेदार ने इसका काम शुरू कर दिया तो नगर निगम ने नक्शा पास करने का प्रस्ताव बीडीए को भेजा। मगर नजूल की जमीन होने के कारण बीडीए ने भी इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है और आगे भी मंजूरी न मिलने की संभावना है। ऐसा होने की स्थिति में यह निर्माण अवैध हो जाएगा और ठेकेदार की राशि भी फंस जाएगी।