करवाचौथ के चौथे दिन यानी आज बुधवार को सभी पुत्रवती माताएं मां अहोई अष्टमी का व्रत रखकर पुत्र की दीर्घायु और भाग्योदय की कामना करेंगी। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाने वाला यह व्रत इस बार दुर्लभ संयोग में होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा के अनुसार इस दिन माता पार्वती की पूजा होती है। पूजा के लिए दीवार पर गेरू से अहोई माता समेत स्याहु और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाते हैं। फिर अहोई माता के सामने चावल की कटोरी, मूली और सिंघाड़े रखे जाते हैं। सुबह दीया रखकर अहोई माता की कहानी कही जाती है। हाथ में लिए हुए चावलों को साड़ी, दुपट्टे आदि में बांधते हैं। लोटे में रखे पानी को करवाचौथ के करवे से ढकें। करवा के पानी को दिवाली पर पूरे घर में छिड़का जाना चाहिए। शाम को बनाए गए चित्रों की पूजा के बाद अहोई माता को 14 पूरी या 8 पुआ का भोग लगाकर बयाना निकालें। शाम को लोटे के पानी से चावल समेत तारों को अर्घ्य देते हुए संतान की दीर्घायु और भाग्योदय की कामना करें। फिर व्रत खोलें।
बुध-पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग
31 अक्तूबर को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होगा। अपनी ही कर्क राशि में गोचर करने की वजह से इस वर्ष 31 साल बाद बुध-पुष्य नक्षत्र का योग बन रहा है। यह योग 30 अक्तूबर की रात 3.50 बजे से ही शुरू होगा, जिसका प्रभाव 31 की रात 2.30 बजे तक रहेगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 31 अक्तूबर सुबह 11.09 बजे से होगी, जो 1 नवंबर को सुबह 9.10 बजे तक रहेगी। उन्होंने माताओं को शाम 5.45 बजे से 7.03 बजे तक पूजा करने का सुझाव दिया है।
अहिंसा का मिलता है संदेश
अहोई व्रत की कथा एक साहूकार की पुत्री के द्वारा मिट्टी खोदने के दौरान खुरपा (कुदाल) से साही के बच्चों के मरने से संबंधित है। यह कथा संदेश देती ह कि कोई भी कार्य सावधानी से करें, जरा सी चूक बड़ा नुकसान कर सकती है।