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बारिश और ओलावृष्टि से हजारों बीघा फसल चौपट

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अमर उजाला लाइव- (बुधवार दो से चार बजे)
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संशोधित

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फ्लैग- बारिश-ओलावृष्टि का कहर
आधा घंटे की बारिश ‘पी’ गई गेहूं का चौथाई हिस्सा
- कहीं 50 तो कहीं 35-25 फीसदी तक नुकसान

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केस-1, दिन बुधवार। वक्त- डेढ़ बजे। स्थान- बड़ा बाईपास। यहां बालीपुर के जमुना प्रसाद अपने खेत के बाहर खड़े थे। बोले- पांच बीघा खेत में गेहूं बोया था। बहुत बेहतरीन फसल हुई थी। पांच से छह क्विंटल प्रति बीघा गेहूं निकलता, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। अब तीन क्विंटल बीघा निकल आए तो बहुत समझो।
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केस-2, वक्त- दो बजे। स्थान- बड़ा बाईपास के निकट गांव कचोली। गांव के मंदिर के बाहर पिंटू पटेल मिले। बोले- मेरे पास 25 बीघा जमीन है। इसमें से 11 बीघा में गेहूं है। अगर बारिश नहीं होती तो 65 क्विंटल से कम गेहूं नहीं निकलता। तीन दिन पहले बारिश और ओले गिरे, फिर हवा चल गई। कम से कम 30 परसेंट कम गेहूं निकलेगा।
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केस-3, वक्त- 2:30 बजे। स्थान- लालपुर और कचोली के बीच का इलाका। यहां किसान गिरजा शंकर अपने खेत में गेहूं काटते मिले। बोले- खेत में गेहूं कटा पड़ा था। अचानक बारिश हो गई। सब भीग गया। ईश्वर का शुक्र है कि दो दिन बाद बारिश नहीं हुई। धूप निकल रही है। वरना बहुत नुकसान होता। फिर भी काफी नुकसान हो गया।

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। तीन-चार दिन पहले तेज आंधी और बारिश के साथ ओले गिरने से गेहूं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। खेत में कटा पड़ा गेहूं बारिश में भीगने से सड़ने की स्थिति में पहुंच गया। गेहूं के अलावा खेत में गन्ने की फसल भी लेट गई है। सरसों, चना, मटर और मसूर को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि सर्वाधिक नुकसान गेहूं को है। हजारों बीघा गेहूं खेत में लेटने और कटे गेहूं में पानी भरने से सड़ने की समस्या पैदा हो गई है।
अमर उजाला की टीम ने बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं समेत अन्य फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए तहसील सदर के लालपुर, नवदिया झादा, कचौली, कीरतपुर, अहलादपुर, तिगरा, भड़सर, परतासपुर, अहइयापुर, तैयदपुर, उगनपुर आदि गांवों का भ्रमण कर कई किसानों से बातचीत की। भ्रमण के दौरान कुल रकबे में लगभग तिहाई से अधिक गेहूं खेत में लेटा पड़ा है। जो गेहूं खेत में खड़ा है, उसे किसान बारिश की आशंका से जल्दी-जल्दी काटने लगे हैं। बारिश और ओले गिरने से निचले खेतों में लगा गेहूं का लांक धूप निकलने से सूख गया है। उसमें ज्यादा नुकसान नहीं हो पाया है। अगर दो दिन धूप नहीं निकलती तो लांक भी सड़ जाता। इन गांवों के किसान रामपाल, अरविंद कुमार, जसवंत सिंह, छोटेलाल, ताराशंकर आदि ने बताया कि बारिश और ओले ने काफी नुकसान पहुंचाया है क्योंकि 70 फीसदी से ज्यादा गेहूं की कटाई और निकासी बाकी है। अधिकांश किसानों ने कहा कि फसल बीमा कंपनी के लोग खेत का सर्वे करने मौके पर नहीं आए। फिलहाल, अब किसान बारिश की आशंका से अपना गेहूं जल्दी से काटने में लगे हैं। एक खेत में सरसों खड़ी थी, जिसमें दाना टूटकर नीचे गिरा मिला।

प्रशासन ने कराया गेहूं का सर्वे
बारिश और ओलावृष्टि से कहीं 25 तो कहीं 35 से 50 फीसदी तक गेहूं का नुकसान हो गया है। कृषि विभाग ने भी 35 प्रतिशत नुकसान स्वीकार किया है। बीमा, कृषि और राजस्व विभाग ने गेहूं के नुकसान का ज्वाइंट सर्वे किया है, इसकी तहसीलवार रिपोर्ट आज फाइनल की जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार फरीदपुर में 690 हेक्टेयर जमीन पर लगभग 35 फीसदी गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। बाकी स्थानों पर सर्वे अंतिम दौर में है। एडीएम फाइनेंस मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि बीमा कंपनी, राजस्व और कृषि विभाग की टीमों ने तहसीलवार गेहूं के नुकसान का सर्वे पूरा कर लिया है। जिलाधिकारी से इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। 12 अप्रैल की दोपहर तक नुकसान का आकलन कर शासन को भेजा जाएगा ताकि किसानों को बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति और सरकार से मुआवजा मिल सके। अन्य फसलों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
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कल से आसमान रहेगा साफ, मौसम गरमाएगा
बुधवार को भी दिन में बादल छाए रहे। दोपहर बाद हल्की बूंदाबांदी हुई। इससे पहले धूप खिली थी। दिन का तापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस और रात में 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान में करीब छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। इससे गर्मी और उमस में कमी आई। अभी कम से दो दिन तक आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे। बारिश कम संभावना कम है। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा ने बताया कि दो दिन बाद मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। अब ओलावृष्टि या बारिश की संभावना नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से कहीं-कहीं बारिश, आंधी और ओले गिरे, लेकिन अब उसका प्रभाव खत्म हो चुका है। 13 अप्रैल के बाद तापमान छह से सात डिग्री तक बढ़ेगा।
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आम का बौर और सरसों के दाने पर भी मार
आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से आम के बौर पर भी मार पड़ी है। बड़ा बाईपास के निकट एक गांव के बाहर बाग में दो पेड़ों पर इक्का दुक्का मटर के बराबर अमिया लगी थीं। किसान मेवाराम ने बताया कि ज्यादातर बौर तेज आंधी में उड़ गया। अमिया भी टहनी से टूटकर गिर गई। अब पेड़ों पर बहुत कम आम दिख रहा है। सरसों के दाने भी बारिश और आंधी में नीचे गिर गए। अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
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