बरेली। पोर्टेबल शॉप मामले में कार्रवाई करने पर नगर आयुक्त के खिलाफ 11 जून से पार्षद नगर निगम में मोर्चा खोले हुए हैं। इसे देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम परिसर और उसकी 200 मीटर की परिधि में धारा-144 लागू कर दी थी। इसके बावजूद पार्षद इसका बार-बार उल्लंघन कर रहे थे। डीएम ने 13 मई को हुए प्रदर्शन के लिए मौखिक अनुमति देने की बात की थी। इससे इस मामले में कार्रवाई के लिए अफसरों के हाथ तो बंध गए लेकिन कहीं न कहीं इसकी टीस उनके मन में थी लेकिन अगले दिन पार्षदों फिर से प्रदर्शन और हंगामा करते हुए नगर आयुक्त के पुतले पर जूता चलाया तो अधिकारियों को पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई करने का मौका मिल गया। डीएम ने यह स्पष्ट किया कि पार्षदों ने 14 जून के प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली थी। कानून तोड़ा है तो पार्षदों को इसका खामियाजा भी भुगतना होगा।
इंदिरा मार्केट में पोर्टेबल शॉप के मामले में नगर आयुक्त ने पार्षद विनोद सैनी पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले को लेकर पार्षदों ने 11 जून को हंगामा और प्रदर्शन किया था। इसी दिन सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम में धारा-144 लागू कर दी। इसके बावजूद 13 जून को भी पार्षदों ने कानून को तोड़ते हुए फिर से प्रदर्शन किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। डीएम का कहना था कि इस प्रदर्शन के लिए उनसे मौखिक अनुमति ली गई थी। भाजपा के जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर ने मिलकर यह परमिशन ली थी। इसके बाद ही अफसरों में पार्षदों के कानून हाथ में लेने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने की टीस थी लेकिन अगले ही दिन जब फिर पार्षदों ने फिर से हंगामा करते हुए नगर आयुक्त के पुतले पर जूता चलाया तो प्रशासन का भी सब्र जवाब दे गया और आखिरकार नौ पार्षदों और बीस अज्ञात पर केस दर्ज कराने की कार्रवाई हो ही गई। डीएम का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति केवल 13 जून के लिए ही थी।
अलग वजह से लगाई जा सकती है दोहरी निषेधाज्ञा
-डीएम ने ईद से पहले जिलेभर में धारा-144 लागू की थी। इसके बावजूद सिटी मजिस्ट्रेट ने यही धारा केवल नगर निगम परिसर में लगा दी। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार का कहना है कि पहले धारा ईद और दूसरे बड़े आयोजन को लेकर लगाई गई थी। चूंकि नगर निगम मेरे अधिकार क्षेत्र में है। यहां धारा-144 लागू लगाने की अलग वजह थी कि यहां पार्षद अराजकता और सरकारी काम में बाधा पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। अलग कारण से मजिस्ट्रेट दोहरी धारा लगा सकता है। इस अधिनियम के एक तहत एक साथ पांच या उससे अधिक व्यक्ति एकत्र नहीं हो सकते। इसे तोड़ने वाले व्यक्ति को एक साल की कैद भी हो सकती है।
14 जून के प्रदर्शन की कोई परमिशन नहीं थी। जब 13 जून को पार्षद प्रदर्शन कर चुके थे तो दोबारा दूसरे दिन फिर इतना उग्र होकर प्रदर्शन करने की क्या जरूरत है। कानून तोड़ा है। इसमें प्रशासन ने तो कार्रवाई की ही है। अब पुलिस अफसरों की तरफ से भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी