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समितियों की ओके रिपोर्ट के बगैर स्कूली वाहनों का नहीं होगा संचालन

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बरेली। डग्गामार वाहनों के जरिए बच्चों की जान खतरे में डाल रहे स्कूलों की मनमानी अब नहीं चलेगी। मोटर यान अधिनियम में 26वें संशोधन की जारी नियमावली के तहत प्रशासनिक और विद्यालय स्तर पर गठित दो समितियों की संस्तुति के बाद ही स्कूलों में वाहन प्रयोग किए जा सकेंगे। साथ ही, 15 वर्ष पूरे कर चुके पेट्रोल और 10 वर्ष पूरे कर चुके डीजल वाहनों के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई है। इस संबंध में सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि नए नियम के तहत जिले में विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके परिवहन संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए ‘जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति’ गठित होगी। आठ सदस्यीय समिति में डीएम अध्यक्ष, एसएसपी उपाध्यक्ष और एआरटीओ प्रवर्तन, नगर आयुक्त, डीआईओएस, बीएसए, परिवहन व्यवसाय से संबंधित दो प्रतिनिधि सदस्य होंगे। समिति की दो बैठकें जनवरी और जुलाई में हाेंगी। समिति वाहनों के खड़े होने का स्थान, वार्षिक जांच के साथ ही आदेशों का अनुपालन कराएगी।
इसके अलावा एक ‘विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति’ का गठन होगा। जो विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी मामलों की देखभाल करेेगी। आठ सदस्यीय समिति में विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अध्यक्ष, डीएम से नामित प्रतिनिधि, विद्यालय संरक्षक के दो प्रतिनिधि, एक पुलिस अधिकारी, बीएसए से नामित एक प्रतिनिधि, डीआईओएस से नामित एक प्रतिनिधि, मेयर से नामित एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति वाहनों के दस्तावेज चेक करेगी, बस की फीस निर्धारण, ड्राइवरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने और पुलिस सत्यापन कराने की जिम्मेदारी संभालेगी। एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि नए निर्देश के तहत वाहनों का संचालन न होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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