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सिंचाई मंत्री के गांव से निकली सड़क के घोटाले को भी ‘पचा’ कर बैठ गए अफसर

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बरेली। जिले की और तमाम सड़कों के साथ पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और ठेकेदार सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के गांव से निकली सड़क के निर्माण में भी गड़बड़ी करने से बाज नहीं आए। सड़कों का मामला शासन में पहुंचने के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने इन सड़कों की जांच के नाम पर सैंपल भी भरवाए। हालांकि बाद में सैंपल लेने में भी फर्जीवाड़ा होने की बात सामने आने पर अधिकारियों ने खुद अपनी निगरानी में नमूने भरवाने और जांच कराने की बात कही पर बाद में अधिकारी कोई एक्शन लेना तो दूर सभी घोटालों को ही दबाकर बैठ गए हैं।
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पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिकारियों ने रम्पुरा से अलीगंज तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सड़क का ठेका लगभग 14 करोड़ रुपये में दिया था। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के गांव गुलड़िया से होकर निकली यह सड़क करीब छह माह पहले पास हुई थी लेकिन चार करोड़ रुपये ही मिलने से इस रोड का काम अधर में लटक गया। इस रोड के साथ तमाम दूसरी सड़कों की शिकायत शासन तक पहुंची। आरोप था कि इन सड़कों को बनाने में उत्तराखंड की बजाय ग्वालियर सहित दूसरी जगहों की सस्ती और घटिया बजरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा फरीदपुर-बीसलपुर सहित दूसरी सड़कों के निर्माण में भी इसी तरह की घपलेबाजी हो रही है। सीएम योगी के आदेश के बावजूद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने पहले इस जांच के आदेश की चिट्ठी ही दबा दी। बाद में मामला खुला तो चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी ने मातहतों को तलब कर सड़कों के सैंपल भरवाकर उनकी जांच कराने के कड़े निर्देश दिए। बताते हैं कि इसके बाद पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने कुछ निर्माणाधीन सड़कों के सैंपल भरवाए। इसमें मंत्री जी के गांव भी सड़क के सैंपल भी शामिल थे। हालांकि इन नमूनों को लेने भी भी खेल हो गया। इसके बाद एक्सईएन ने खुद अपनी निगरानी में नमूने भरवाकर उन्हें प्रयोगशाला में भिजवाकर जांच कराने की बात कही। सूत्र बताते हैं कि मामले में कुछ दबाव कम होते ही एक बार फिर अफसर इन घोटालों को पचा कर बैठ गए हैं। कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हुई हैं।
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सड़कों की सैंपल भरवाकर जांच करने के आदेश दिए हैं। इसमें संबंधित इंजीनियरों ने क्या किया है। इसकी समीक्षा की जाएगी।
-राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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