फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अबकी ऊपर वाला नहीं मेहरबान, सिंचाई का इंतजाम कर लें किसान

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बरेली। मौसम विज्ञानियों ने भविष्यवाणी की है कि इस बार जून में प्री मानसून बारिश सामान्य से 60 फीसदी कम हो सकती है। इससे गर्मी के साथ किसानों की दिक्कतें भी बढ़ेंगी। मानसून पहले से ही लेट है। लिहाजा हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश 10 जुलाई से पहले होने की उम्मीद नहीं है। किसानों को सिंचाई के अपने इंतजामों पर निर्भर रहना पड़ेगा। धान, गन्ना समेत दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई लेट हो सकती है। उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
केरल में आमतौर पर जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना रहती है। मगर इस बार केरल में ही मानसून एक सप्ताह देरी से सक्रिय हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने उत्तर भारत, खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून 10 जुलाई तक आने का अनुमान लगाया हे। मानसून की देरी के कारण प्री-मानसून बारिश सामान्य से औसतन 60 फीसदी कम रहेगी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा के अनुसार अप्रैल और मई में भी प्री-मानसून बारिश सामान्य से काफी कम रही। जून में सामान्य तौर पर 180 एमएम बारिश होती है, लेकिन मानसून की देरी के चलते इस बार जून में प्री-मानसून बारिश 80 मिलीमीटर ही रहने के आसार हैं। इसका असर खरीफ की फसलों जैसे-धान, गन्ना, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मूंगफली, अरहर, तिलहन आदि के उत्पादन पर पड़ सकता है। कम बारिश होने से सर्वाधिक असर धान के उत्पादन पर पड़ेगा क्योंकि इसकी सिंचाई के लिए अधिक पानी की जरूरत पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कल तेज हवाओं के साथ हो सकती है बूंदाबांदी
पहली जून को अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री रहा जो सामान्य था। दिन में चटक धूप रही। न्यूनतम तापमान 28.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जो सामान्य से 2.0 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। मौसम वैज्ञानिक डॉ. कुशवाहा के अनुसार तीन जून को दोपहर बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो जाएगा। इस कारण तीन से पांच जून तक जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के साथ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी तेज हवाएं चलने के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। दो से तीन जून तक आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें