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मोदी जी! अफसर जब इतना चूना लगाएं तो कैसे होगी किसानों की दोगुनी आय

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केस- 1
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फरीदपुर में कृषि विभाग के सरकारी गोदाम पर किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर देने के लिए धान का बीज आया है। गोदाम से सील्ड बोरी खरीद ले गए कुछ किसानों ने उसे घर पर खोला तो उसमें पैक बीज काले रंग का निकला। इसके बाद किसानों ने बीज वापस कर दिया। कई दिनों तक गोदाम प्रभारी को भी किसानों की खरीखोटी सुननी पड़ी।

केस- 2
गांव दलेलनगर के प्रधान ने पिछले साल सरकारी गोदाम से धान का बीज खरीदा था जो एचयूआर 917 प्रजाति का था। किसानों का कहना है कि यह बीज उन्होंने अपने खेतों में बोया तो वह ठीक से जमा ही नहीं। एक बीघा में बमुश्किल डेढ़ से दो क्विंटल धान की ही उपज हो पाई जबकि आमतौर पर एक बीघे में ढाई-तीन क्विंटल तक धान निकलता है।
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बरेली। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है लेकिन सरकारी विभागों की लापरवाही उन्हें पूरी तरह बर्बाद करने पर तुली हुई है। किसानों को सब्सिडी पर दिए जाने वाले धान के बीज की पिछले साल भी तमाम शिकायतें हुई थीं, इस बार तो हालात और खराब हो गए हैं। इस बार किसानों को 50 प्रतिशत छूट पर बीज देने के लिए कृषि विभाग में जो सीलबंद पैकेट आए हैं, उन्हें खोलने पर उनमें काले रंग का बीज निकल रहा है। मोटे धान की प्रजाति पीआर-121 और पंत-24 के बीज गुणवत्ता को किसानों ने खारिज कर दिया है। गोदामों से ले जाए गए सीलबंद पैकेट वापस किए जा रहे हैं। कृषि विभाग जवाबदेही से बचने के लिए इस बीज को प्राइवेट दुकानों पर बेचने में जुटा हुआ है। विभागीय कर्मचारियों पर कागजी खानापूरी कर किसानों में फर्जी खरीद का रिकॉर्ड तैयार करने और सब्सिडी उनके खातों में भेजने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में औसतन 25 फीसदी कृषि भूमि पर धान बोया जाता है। प्रगतिशील और बड़े किसान तो एनडीआरएफ-2064 कुठला फोर, हाइब्रिड-3444 के साथ बासमती-1509, 1121 आदि प्रजातियां बोना पसंद करते हैं। इस सीजन में धान की नई हाइब्रिड प्रजाति ताज की मांग भी ज्यादा है जो बासमती 1509 से निकली है। बासमती या शरबती प्रजातियों के बीज 55 रुपये से 75 रुपये प्रति किलो की दर से मार्केट में उपलब्ध हैं। धान की मोटी प्रजातियों का बीज भी दुकानों पर 25 रुपये से 30 रुपये किलो तक की दर से बिक रहा है। कृषि विभाग में 1500 किलो प्रमाणित धान का बीज पीआर-121 और पंत-24 आया है जो मोटी प्रजाति है। सूत्रों की मानें तो सरकारी गोदामों के हाइब्रिड धान बीज की मुहर लगे जो सीलबंद पैकेट किसान खरीदकर ले जा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। किसी पैकेट में बीज काला है या फिर दानों से चूरन निकल रहा है। कई ब्लॉकों के सरकारी गोदामों में किसान खरीदा गया बीज वापस करने पहुंच रहे हैं।

धान बीज की खरीद में ही कर दिया गोलमाल
सूत्रों के मुताबिक कृषि विभाग में धान बीज खरीदने में पिछले सालों की तरह इस बार भी बड़े स्तर पर खेल किया गया है। बताया जाता है कि कृषि विभाग को धान का बीज राजकीय बीज निगम (एनएससी) से खरीदना चाहिए लेकिन इसे मंडी या निजी स्तर से खरीदकर बगैर सुखाए पैकेट में सील कर दिया गया। बीज की शोधन प्रक्रिया ठीक से न होने की वजह से ही गीले बीज में फंगस पैदा हो गया और इसी कारण वह काला पड़ गया। पैकेट में बीज धूल मिट्टी लगा भी निकल रहा है। शिकायतों के मुताबिक उसमें खरपतवार भी है।

किसान नहीं खरीद रहे तो दुकानों पर खपाएं बीज
किसानों के घटिया बीज खरीदने में दिलचस्पी न दिखाने पर कृषि विभाग अब अपने ही कर्मचारियों पर दबाव बना रहा है कि लवे प्राइवेट दुकानों पर बीज बेचने का इंतजाम करें। कहा जा रहा है कि अगर यह बीज 15 से 16 रुपये किलो में भी बिके तो तुरंत बेच दें। सरकारी रेट 32.80 रुपये किलो का है जिसके हिसाब से कर्मचारियों को पैसा जमा करने को कहा जा रहा है। नाम न छापने की गुजारिश पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उनसे दो से तीन हजार किसानों के खसरा-खतौनी के इंतखाब लाकर डाटा कंप्यूटर में फीड कराने और सब्सिडी उनके खातों में भेजने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद किसानों से सब्सिडी वापस लेकर उन्हें अपनी जेब से निकली रकम की भरपाई करनी पड़ेगी।
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यहां के किसान खेत में मोटा धान ही लगाना पसंद करते हैं। इसीलिए इन्हीं प्रजातियों का बीज गोदामों में है। बीज में कोई दिक्कत नहीं है। कोई ऐसी बात फैला रहा है तो वह गलत है। उस पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। धान का बीज किसान ले रहे हैं। - धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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