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योगी जी! जांच रिपोर्ट में भी है गड़बड़झाला, 350 किलोमीटर केबिल मीटर में बदल डाला

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बरेली। शहर और गांवों में बिजली का नेटवर्क दुरुस्त करने के लिए भारत सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश को दी गई हजारों करोड़ की धनराशि में पॉवर कॉरपोरेशन के अफसरों ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर जमकर घोटाले कर डाले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच का आदेश दिया तो इनकी परतें भी खुल गईं। इसी जांच में पता चला कि बरेली जोन में भी सौ करोड़ से ज्यादा रकम अफसरों की जेब में पहुंची थी, मगर जांच एजेंसी से सांठगांठ कर इस घोटाले को दबा दिया गया। अभी तक इस घोटाले की रिपोर्ट शासन तक नहीं पहुंची है।
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मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में शाहजहांपुर स्टोर में काफी सामान कम या ज्यादा पाया गया। पूरी हेराफेरी सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की निकली है जिसका हिसाब अफसर नहीं दे पा रहे हैं। इस वजह से जांच रिपोर्ट भी तैयार नहीं हो पाई है जबकि मध्यांचल वितरण निगम प्रबंध निदेशक संजय गोयल कई बार रिपोर्ट तलब भी कर चुके हैं। बताया जाता है कि जांच एजेंसी आैर विभागीय अफसरों से साठगांठ होने से स्टोर में करोड़ों रुपये कीमत का सामान गायब होने की रिपोर्ट ही बदल दी गई है। जांच में पहले स्टोर में हाईटेंशन लाइन का करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर केबिल बताया गया। बाद में ‘आपसी समझौता’ होने पर भूल सुधार के नाम पर किलोमीटर की जगह मीटर लिख दिया गया। बाद में यह रिपोर्ट भी जांच कर रहे अफसरों ने कार्यालय से गायब से करा दी, इसलिए एमडी के बार बार कहने पर भी जांच रिपोर्ट मुख्यालय तक नहीं पहुंच पा रही है। लेकिन खबर छपने पर विभाग में हलचल मची हुई है।

साहब! बरेली, बदायूं, पीलीभीत में ‘चंदा’ देकर मिली ‘क्लीन चिट’
ग्रामीण और शहरी विद्युतीकरण योजना में हुए प्रदेश व्यापी घपले में बरेली, बदायूं, पीलीभीत जिला स्थित विभागीय स्टोर भी संदेह के घेरे में हैं। हालांकि इन जिलों में संबंधित स्टाफ ने आपसी ‘चंदा’ एकत्र कर ‘क्लीन चिट’ जारी करा दी है। इन तीनों जिलों में बड़ी तादाद में सामान की हेराफेरी बताई जाती है। जांच अफसरों ने मनमाफिक ‘चंदा’ देकर लीपापोती ऐसी कराई है कि सबूत जुटाना भी आसान नहीं होगा।
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