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आशाओं पर शिकंजा कसते ही जिला अस्पताल में बढ़े प्रसव

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बरली। गर्भवती महिलाओं को कमीशन के लिए सरकारी अस्पतालों से निजी अस्पतालों में पहुंचाने के मामले में आशाओं पर शिकंजा कसते ही जिला महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या में बढ़ गई। उधर, स्वास्थ्य विभाग उन आशाओं को भी चिह्नित करने की कवायद में जुटा हुआ है जो इस गोरखधंधे में शामिल थीं। अफसरों का कहना है कि इन आशाओं को बर्खास्त किया जाएगा।
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मोटा कमीशन झटकने के लिए आशा वर्कर जिला अस्पताल पहुंची गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में भेज रही थीं। इससे महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या लगातार कम हो रही थी। 26 मई को शहर के अर्क नं.-4 अस्पताल में जिले के कई ब्लाकों से आशा वर्करों को बुला कर मीटिंग की गई। मामला अमर उजाला में उछला तो स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और आशा वर्करों को नोटिस जारी किया। बुधवार को ‘अर्क नं. 420’ पीने वाले छह और अस्पतालों को भी नोटिस जारी किया गया। इतनी कार्रवाई से ही महिला अस्पताल में प्रसव कराने पहुंची महिलाओं की संख्या बढ़ गई है। महिला सीएमएस ने बताया कि 26 मई को जिला महिला अस्पताल में चार सामान्य और चार सिजेरियन प्रसव कराए गए। 27 मई को सात सामान्य और पांच सिजेरियन प्रसव हुए। 27 मई के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर गंभीर हुआ और आशा वर्कर व निजी अस्पताल पर शिकंजा कसा। इसके बाद 28 व 29 मई को 12-12 सामान्य व दो-दो सिजेरियन प्रसव हुए।
उधर, मामले की जांच कर रहे एसीएमओ डा. रंजन गौतम ने बताया कि उनकी टीम आशाओं को चिह्नित करने में जुटी है। कुछ आशाएं चिह्नित की गई हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्य मिलने के बाद इन आशा वर्करों को बर्खास्त कराया जाएगा। डा. गौतम ने बताया कि आशा वर्करों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए अब अस्पतालों में छापे भी मारे जा रहे हैं।
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अर्क नं. चार के संचालक पहुंचे एसीएमओ दफ्तर
बरेली। 26 मई को बिना सीएमओ की अनुमति के आशा वर्करों को अस्पताल में बुलाकर बैठक करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए नोडल अधिकारी ने अस्पताल का संचालिका को नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था। बुधवार को नोटिस सर्व होने के बाद अस्पताल की संचालिका की ओर से उनके पति गुरुवार को नोडल अधिकारी के दफ्तर पहुंचे और लिखित जवाब दाखिल किया। नोडल अधिकारी ने बताया कि लिखित जवाब मिल गया है। उसका परीक्षण करने के बाद अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।
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