बरेली। नर्सिंग होम से मिल कर सरकारी अस्पतालों में प्रसव न करवाकर कमीशन के लालच में गर्भवती को निजी अस्पताल भेजने का मामला कोई नहीं है। पिछले कई साल से यह खेल चल रहा है। ऐसा भी नहीं कि सेहत महकमे के अफसरों को इसकी भनक न हो, लेकिन तय रकम पहुंचने के कारण वह भी इस पर चुप्पी साधे हुए थे। मामला सिर से ऊपर पहुंच जाने पर जब जिला महिला अस्पताल की सीएमएस ने इस मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाया तब इस पर कोई कार्रवाई शुरू हो सकी है। सीएमओ कार्यालय के स्तर से शुरू हुई यह कार्रवाई कब तक और कहां तक चलेगी यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन पिछले तीन सालों में सरकारी अस्पतालों में सामान्य व सिजेरियन प्रसव की लगातार घटती संख्या सेहत महकमे के लिए चिंता का सबब बन सकती है।
पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2017 में जिला महिला अस्पताल में जनवरी से दिसंबर तक 5084 महिलाओं के सामान्य प्रसव कराए गए। जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा घट कर मात्र 4480 रह गया। इसी तरह 2017 में 1433 सिजेरियन प्रसव जिला महिला अस्पताल में कराए गए। जबकि 2018 में कुल 1174 सिजेरियन प्रसव हुए। बात अगर 2019 की करें तो मई माह की 27 तारीख तक 1158 सामान्य व 416 सिजेरियन प्रसव हुए। जबकि वर्ष 2017 में 1916 सामान्य व 579 सिजेरियन, 2018 में 1636 सामान्य व 504 सिजेरियन प्रसव हुए। जिला अस्पताल की सीएमएस डा. अलका शर्मा का कहना है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव की गिरती संख्या के पीछे आशाओं का हाथ है। वह गर्भवती महिलाओं को बरगला कर निजी नर्सिंग होम ले जाती हैं।
सामान्य प्रसव
वर्ष जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई
2017 454 413 345 358 346
2018 396 385 272 317 266
2019 334 321 364 193 246
सिजेरियन प्रसव
2017 105 120 112 124 118
2018 112 116 82 97 97
2019 87 97 119 68 90