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कुष्ठ आश्रम प्रकरण- पार्षदों की शिकायत पर उन्हीं से सवाल- क्या बोर्ड प्रस्ताव जरूरी

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बरेली। डीडीपुरम् में करीब 60 साल पुराने कुष्ठ आश्रम की जमीन के मामले की जांच कर रहे एडीएम सिटी को नगर आयुक्त ने ये जवाब भेजा है कि जमीन नगर निगम की थी। निगम के हित में इसे वापस लिया गया है। इसलिए इसका नगर निगम बोर्ड में प्रस्ताव लाना और उसे पास करना जरूरी नहीं है। नगर आयुक्त के इस जवाब के बाद एडीएम ने शिकायतकर्ता पार्षदों को नोटिस दिया है कि क्या उनके पास नगर निगम अधिनियम की ऐसी सुसंगत धाराओं का रिकार्ड है, जिसमें ऐसे प्रकरण में बोर्ड का प्रस्ताव लाने का प्रावधान है। अगर है तो एक जुलाई को कलक्ट्रेट में प्रस्तुत करें।
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नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. कुष्ठ आश्रम की जमीन पर स्मार्ट सिटी के तहत सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट बनाना चाहते हैं। उनके निर्देश पर निगम की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में कुष्ठ आश्रम की जमीन पर कब्जा ले लिया था। वहीं कुष्ठ रोगियों ने भी नगर निगम में हंगामा किया था। सुनील खत्री समेत आसपास के कुछ व्यापारी भी उनके समर्थन में थे। पुलिस की मौजूदगी में निगम द्वारा लगाए गए सीमेंट के पिलर भी कुष्ठ रोगियों ने उखाड़ दिए। मेयर उमेश गौतम और कुछ पार्षदों ने राज्यपाल को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना कुष्ठ आश्रम की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। इसके पीछे स्मार्ट सिटी के सीईओ सैमुअल पॉल एन. की मंशा बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने की है। यह मामला राज्यपाल तक पहुंचने के बाद राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव हेमंत राव ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को मामले की जांच रिपोर्ट भेजने के आदेश छह जून को दिए थे। मामले की जांच रहे एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने जवाब भेजा है कि चूंकि यह जमीन नगर निगम है और इस पर अतिक्रमण था। अवैध कब्जा हटाने के लिए निगम प्रशासन को बोर्ड में प्रस्ताव पास कराने की कोई जरूरत नही है। इसलिए बोर्ड प्रस्ताव लाने की बात ही गलत है। एडीएम सिटी ने बताया कि शिकायतकर्ता वार्ड-74 घेरशेख मिट्ठू के पार्षद सलीम पटवारी और वार्ड-16 संजय नगर अवनेश कुमार को नोटिस भेजा है कि उनके पास ऐसे मामले में बोर्ड प्रस्ताव पास कराने संबंधी कोई पत्रावली है तो उसे एक जुलाई को दिखाया जाए।
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