बरेली। अफसरों और कर्मचारियों के अपने गणित की वजह से सरकारी महकमों में नियम-कायदे कैसे धूल खाते हैं, भू संपत्तियों की कैशलेस रजिस्ट्री कराने आदेश भी इसकी मिसाल बन गया। संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में ब्लैक मनी के इस्तेमाल के साथ सरकारी राजस्व की चोरी रोकने की मंशा से 2015 में जारी किया गया इस आदेश पर तीन साल बाद भी सिर्फ इस वजह से अमल नहीं हो पाया क्योंकि इसके लागू होने रजिस्ट्री विभाग में गैरवाजिब लेनदेन भी बंद हो जाना तय था। आदेश जारी करने के बाद लंबी तानकर सोए शासन के अफसर अब फिर जागे हैं। आईजी निबंधन की ओर से सब रजिस्ट्रारों को आदेश जारी किया गया है कि संपत्तियों की रजिस्ट्री में 20 हजार रुपये से ज्यादा कैश का लेनदेन किसी हालत में न किया जाए। आदेश की अनदेखी करने पर सब रजिस्ट्रार पर दैनिक तौर पर जुर्माना लगाए जाने का भी निर्देश दिया गया है। इसके बाद रजिस्ट्री विभाग इस कायदे पर अमल करने को तैयार हो गया है।
अचल संपत्तियों का वास्तविक मूल्य छिपाकर उनके बैनामे कराने का खेल रजिस्ट्री विभाग में काफी पुराना है। एक तरफ तो इस खेल की वजह से संपत्ति खरीदने और बेचने वाले सरकारी राजस्व का नुकसान करके खुद फायदा उठा रहे थे तो दूसरी तरफ रजिस्ट्री विभाग का स्टाफ को भी इसमें अच्छा-खासा नाजायज हिस्सा मिल रहा था। सरकार के लिए इससे भी ज्यादा चिंतनीय यह था कि इस खेल में ज्यादातर ब्लैक मनी का इस्तेमाल हो रहा था। देश में मोदी सरकार आने के बाद इस खेल पर लगाम लगाने की कोशिश की गई। सितंबर 2015 में आयकर अधिनियम की धारा 209 एसएस के तहत अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में कैश के लेनदेन पर पाबंदियां लगा दी गईं। सरकार ने आदेश दिया कि अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में 20 हजार से ज्यादा रकम का कैश लेनदेन नहीं होगा। बाकी रकम का चेक-ड्राफ्ट या आरटीजीएस जैसे माध्यमों से लेनदेन किया जाएगा।
सरकार का यह आदेश रजिस्ट्री विभाग के अफसरों ने फाइलों में ही दबाकर छोड़ दिया। शासन के अफसरों ने भी तीन साल तक यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि आदेश पर क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं। इस बीच रजिस्ट्रियों में खेल पहले की तरह चलता रहा। सरकारी राजस्व की चोरी हुई और ब्लैक मनी का भी जमकर इस्तेमाल हुआ। अब फिर शासन स्तर पर सख्ती दिखाए जाने के बाद आदेश का पालन शुरू कराने के लिए कमर कसी गई है। रजिस्ट्री विभाग के आईजी की ओर से इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश का पालन न होने पर सब रजिस्ट्रारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।
बहाना.. इस आदेश से लक्ष्य पूरा होना मुश्किल हो जाता
रजिस्ट्री विभाग में चलने वाले खेल में नीचे से लेकर ऊपर तक अफसर शामिल हैं, यही वजह है कि तीन साल तक आदेश का पालन न किए जाने पर किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई है। रजिस्ट्री विभाग के अफसर अपने बचाव में कह रहे हैं कि अगर इस आदेश पर पालन किया जाता तो बैनामों की संख्या और कम हो जाती और ऐसे में राजस्व लाभ के जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनका पूरा कर पाना भी मुश्किल हो जाता। अफसरों का यह भी कहना है कि इसके बावजूद वे दो लाख रुपये से ज्यादा कैश का लेनदेन नहीं होने दे रहे थे। हालांकि दो लाख की सीमा किस आदेश के तहत तय की गई, इसका जवाब अफसर नहीं दे पा रहे हैं।
मुसीबत.. कम आय वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें
अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में अधिकतम 20 हजार के नकद लेनदेन का नियम लागू होने से कम आय वाले लोगों को कुछ परेशानी हो सकती है। माना जा रहा है कि उन लोगों को दिक्कत हो सकती है जो सस्ता प्लाट खरीदकर आपसी समझौते के तहत विक्रेता को किस्तों पर उसका भुगतान करते हैं। चूंकि बैनामा कराते समय अब चेक या ड्रॉफ्ट से भुगतान दिखाना होगा, लिहाजा उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाएंगी। विभागीय अधिकारी भी इसका कोई विकल्प न होने की बात कह रहे हैं। हालांकि ऐसे लोगों की तादाद बेहद गिनीचुनी ही है। फिर भी कुछ कातिबों ने आईजी और डीआईजी स्टांप से मिलकर यह समस्या उनके सामने रखी। उन्होंने कहा कि बैनामे पहले से कम हो रहे हैं, इस आदेश से और कम हो जाएंगे। दस्तावेज लेखक संघ के महासचिव राजेश सक्सेना ने बताया कि नियम अव्यवहारिक है, सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
बगैर पैन नंबर के स्टांप खरीद भी नहीं
बैनामों के लिए स्टांप खरीद पर क्रेता और विक्रेता दोनों का पैन नंबर लिया जाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। वैसे आयकर नियमावली यह है कि 10 लाख रुपये से ज्यादा के स्टंाप लेने पर पैन नंबर दर्ज होना चाहिए। रजिस्ट्री विभाग के स्टाफ का कहना है कि स्टांप खरीद कितनी ही कीमत की हो, अब सभी के लिए पैन नंबर मांगे जा रहे हैं।
बैनामे के समय संपत्ति के क्रेता और विक्रेता दोनों को ही अधिकतम बीस हजार रुपये कैश के लेनदेन की छूट मिलेगी। इसके बगैर अब किसी भी संपत्ति का बैनामा नहीं हो पाएगा। इस आदेश का अब कड़ाई से अनुपालन कराया जा रहा है। -अमरेश त्रिपाठी, डीआईजी स्टांप