पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों और महंगाई के विरोध में कांग्रेस का देशव्यापी बंद बरेली में फ्लाप हो गया। कांग्रेस नेता सड़कों पर बाजार बंद कराने की कवायद करते रहे, लेकिन उनके अपने ही प्रतिष्ठान खुले रहे। कुछ स्थानों पर नोकझोंक भी हुई। कोतवाली पुलिस से भी कांग्रेसी भिड़ गए थे।
जिलाध्यक्ष रामदेव पांडे, शहर अध्यक्ष चौधरी असलम मियां आदि ने कार्यकर्ताओं को सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे एकत्र होने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक भी कार्यकर्ता नहीं पहुंचा। 10 बजे के बाद कार्यकर्ता आने शुरू हुए और फिर फोटो सेशन होने लगा। इसके बाद कांग्रेस नेता नारेबाजी करते हुए बाजारों की ओर बढ़े। इस बीच वे कोतवाली पुलिस से भिड़ गए। जब बाजार खुलने का समय हो गया तो नेताओं ने कारोबारियों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया, लेकिन व्यापारी उनके आग्रह को अनसुना कर दुकानें खोलते रहे। नेताओं को काफिला मुख्य बाजार कुतुबखाना, बड़ा बाजार, सराफा, बांसमंडी, श्यामगंज, कालीबाड़ी, कॉलेज मार्ग, नावल्टी चौराहा आदि स्थानों पर पहुंचे। पैदल चल रहे ज्यादातर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता धीरे-धीरे गायब होते रहे। फिनिशिंग प्वाइंट पर पहुंचते-पहुंचते गिने चुने कांग्रेसी ही बचे।
खुले रहे नेताओं के प्रतिष्ठान
अपने प्रतिष्ठान खोलकर ज्यादातर कांग्रेसी बंद सफल बनाने में लगे रहे। उनकी फैक्ट्री और दुकानें खुली रहने पर कार्यकर्ता कानाफूसी करते दिखे। इसके साथ ही कांग्रेसी गुटबाजी में लगे रहे। हालांकि सभी ने बंद सफल होने का दावा किया, जबकि कांग्रेस नेता बाजार बंद कराने पर कम फोटो सेशन पर ज्यादा फोकस करते रहे। फोटो खिंचाने के दौरान कई बार धक्का-मुक्की भी हुई। कई कांग्रेसी बंद आंदोलन से अलग रहे।
यह रहे मौजूद
प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी प्रेमप्रकाश अग्रवाल, अजय शुक्ला, जिलाध्यक्ष रामदेव पांडे, शहर अध्यक्ष असलम मियां, मुजाहिद हसन खां, आशुतोष शर्मा, नीतू मेहरोत्रा, इकबाल सिंह वाले, अनुज गंगवार, जियाउर रहमान, महेंद्र सिंह, कौशल पंडित आदि।
रालोद ने भी दिया साथ
रालोद ने भी कांग्रेस के बंद में साथ दिया। बाकर अली, इक्तेेदार उद्दीन, उपमेंद्र सक्सेना आदि ने बाजारों में दुकानदारों से संपर्क करने के बाद जिला प्रशासन को महंगाई के विरोध में ज्ञापन सौंपा।