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आखिरकार कॉलेजों से मांगना ही पड़ा सहयोग

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बरेली।
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केंद्रीकृत एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने से पहले जो कार्यशाला होनी चाहिए थी विश्वविद्यालय प्रक्रिया शुरू होने के बाद बुला रहा है। अगर पहले से ही कॉलेजों का साथ ले लिया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती। बेपटरी हुई प्रवेश प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए कॉलेजों की कार्यशाला पांच और छह जुलाई को बुलाई गई ताकि आवेदन का ग्राफ बढ़ाया जा सके और समय से प्रवेश हो सके।
पांच जुलाई को बरेली, पीलीभीत, बिजनौर, संभल और छह जुलाई को बदायूं, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, अमरोहा और रामपुर के कॉलेजों के प्राचार्यों को कार्यशाला के लिए बुलाया गया है। कार्यशाला शिक्षा एवं सहबद्ध विज्ञान विभाग में 11 से एक और दो से शाम चार बजे तक होगी। वहीं सूत्रों का कहना है कि विवि अब कॉलेजों को ही प्रवेश कराने की जिम्मेदारी सौंपना चाहता है। जो छात्र वहां आए उसका आवेदन कॉलेज अपने स्तर से ही करा दे।
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वेबसाइट पर दूर नहीं हो रहीं दिक्कतें
फार्म भरने में वेबसाइट पर दिक्कतें दूर नहीं हो पा रहीं है। छात्र और कॉलेज संचालक परेशान हैं। तमाम कॉलेज गुरुवार को भी वेबसाइट पर अपडेट नहीं हुए और कई सब्जेक्ट भी शो नहीं हुए। विवि प्रशासन को शिकायत भी की गई पर कोई निस्तारण नहीं हो सका।
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तो कॉलेज महंगा बेचेंगे प्रॉस्पेक्टस
इस बार कॉलेजों के काउंटर सूने पड़े हैं। न कोई आवेदन लेने पहुंच रहा है और न ही उनके प्रॉस्पेक्टस बिक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों का तो यह हाल है कि वो गांव-गांव जाकर अपने कॉलेज में एडमिशन लेेने के लिए कह रहे हैं। कुछ कॉलेजों ने प्रॉस्पेक्टस छपवाए हैं तो कुछ ने छपवाए तक नहीं। बरेली कॉलेज में ही अभी तक प्रॉस्पेक्टस नहीं आए हैं, जबकि हर साल इन दिनों में आ जाते थे। इस बार प्रॉस्पेक्टस का बोझ भी छात्रों पर ज्यादा पढ़ने की उम्मीद है क्योंकि कॉलेजों को इस बार पंजीकरण का पैसा नहीं मिला, जिसकी वसूली वो अब प्रॉस्पेक्टस से ही करना चाहते हैं।
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