बरेली। क्षय रोग (टीबी) के मरीजों की देखभाल और जाने- अनजाने में दूसरों से मिलने के दौरान बेपरवाही से बच्चे भी क्षय रोग की संक्रमण में आ रहे हैं। जिले में अब तक टीबी से 2,057 मरीज संक्रमित मिले हैं। उसमें से 132 बच्चे भी इसकी गिरफ्त मेें आ गए हैं। यह बच्चे किसी न किसी टीबी मरीज के संपर्क में आए थे। सभी मरीजों की आईडी पोर्टल पर बनाकर इलाज शुरू कर दिया गया है।
वर्ष 2025 तक देश और प्रदेश को क्षय रोग से मुक्त करना है। इसके लिए एक जनवरी से बरेली में क्षय रोग मुक्ति मुहिम शुरू हुई थी। जिले की आबादी के आठ फीसदी यानी करीब आठ लाख लोगों की मैपिंग कराई गई। इसमें 6,66,050 लोगों की स्क्रीनिंग हुई। उसमें से 2.35 लाख लोग 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं। जांच के दौरान 75,566 डायबिटीज रोगी मिले। इसके अलावा 1,56,986 तंबाकू और 99,041 शराब सेवन करने वाले मिले हैं। 22,880 लोग टीबी के पूर्व मरीजों के साथ संपर्क में रहे। इन सभी श्रेणियों जांच के बाद 2,057 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। इसमें से करीब तीन सौ लोग पूर्व में किसी न किसी टीबी संक्रमित के संपर्क में रहे थे। आकड़ों के अनुसार कुल संक्रमित में से 15 वर्ष तक के 132 बच्चों भी टीबी से संक्रमित मिले हैं। इनके अभिभावक या परिवार का कोई न कोई सदस्य टीबी से संक्रमित था।
संक्रमित की बेपरवाही से फैली बीमारी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि इन बच्चों के कोई न कोई परिजन संक्रमित रहे हैं। इन मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। वह दवा का सेवन कर रहे हैं या नहीं, उनकी निगरानी की जा रही है। बताया कि क्षय रोग फैलने की वजह मरीज की पहचान में देरी है। मरीजों के खांसने, छींकने और बातचीत में लापरवाही से भी बीमारी के संक्रमण का खतरा रहता है। अमर उजाला ब्यूरो