बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बन रहे एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक के लिए हो रहे खनन पर बखेड़ा हो गया। कर्मचारियों ने विरोध करते हुए काम रुकवा दिया। उनका आरोप था कि टेंडर की शर्तों में यह नहीं है। एजेंसी अवैध तरीके से खनन कर रही है। क्रीड़ा सचिव के साथ कर्मचारी नेताओं की काफी नोकझोंक भी हो गई। अब टेंडर की शर्तें देखने के बाद ही आगे का काम शुरू हो सकेगा। मामला कुलपति और वित्त अधिकारी के सामने भी रखा जाएगा।
दरअसल विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय के क्रीड़ा मैदान में एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक बन रहा है। ट्रैक के नीचे दूसरे किस्म की मिट्टी की जरूरत थी, जो कुलपति आवास के पास खाली पड़े मैदान से निकालकर लाई जा रही थी। ट्रैक से निकली मिट्टी को वहां डाला जा रहा है। कर्मचारी नेताओं का कहना था कि एजेंसी को मोटा भुगतान हो रहा है तो मिट्टी का इंतजाम खुद करे। विश्वविद्यालय कैंपस में खनन क्यों कर रहे हैं। कर्मचारी नेता मनोज पांडेय, राज बहादुर समेत कई लोग मैदान में पहुंच गए और खुदाई कर ही जेसीबी को रुकवा दिया। क्रीड़ा सचिव प्रोफेसर एके जेटली मौके पर पहुंचे। कर्मचारी नेताओं से उनकी काफी नोकझोंक हो गई। प्रोफेसर जेटली का कहना था कि टेंडर की शर्तों के तहत की खनन की अनुमति दी गई है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि शर्तें देखने के बाद ही काम शुरू होने दिया जाएगा। उसके बाद काम रुकवा दिया गया। कर्मचारी नेता मनोज पांडेय का कहना है कि अगर टेंडर की शर्तों में खनन है तो ठीक हैं। अवैध तरीके से लाखों रुपयों की मिट्टी क्यों दी जा रही है। क्रीड़ा सचिव प्रोफेसर एके जेटली ने कहा कि शर्तों के अनुसार ही मिट्टी निकलवाई गई। बाकी मिट्टी कैंपस में जहां-जहां जरूरत है वहां डलवाई जा रही है। कर्मचारियों को टेंडर की शर्तों को दिखा दिया जाएगा।