बरेली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) गोदामों में लाखों क्विंटल भंडारित खराब अनाज गरीबों को वितरित करने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। क्योंकि राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) मंडल प्रबंधक ने चारों जिलों के प्रभारियों को आदेश जारी किया है कि एफसीआई गोदामों में चिह्नित हुआ खराब अनाज का भुगतान कतई न किया जाए। इसके साथ ही, गेहूं, चावल उठाने से पहले उसकी गुणवत्ता आदि भी सुनिश्चित कर ली जाए।
अमर उजाला ने राइस मिल की मिलीभगत से खराब चावल एफसीआई गोदामों में सप्लाई होने की खबर प्रकाशित की तो एफसीआई और एसएफसी विभागों में खलबली मच गई। बता दें कि केंद्रीय खाद्य मंत्रालय टीम ने बरेली मंडल समेत कई जिलों में स्थित गोदामों में भंडारित अनाज की गुणवत्ता चेक की थी। जिसमें गेहूं, चावल अधोमानक पाया गया था। इसके बाद संबंधित एफसीआई क्षेत्र प्रबंधकों ने इसके लिए राइस मिलों और गेहूं खरीद सरकारी एजेंसियों पर दोषारोपण कर दिया। इसके जवाब में कुछ राइस मिल हाईकोर्ट चले गए और स्टे ले आए। उनके मुताबिक जब चावल डिलीवरी दी थी तब एफसीआई गुणवत्ता टीम ने सर्टिफिकेट जारी किया था। इसके बाद भी उन्हें भुगतान नहीं मिला। यही बात क्रय एजेंसी प्रभारियों का कहना है। खबर छपते ही एसएफसी विभाग के कान खड़े हो गए और घोषित खराब अनाज नहीं उठाने का फैसला किया।
टीम गठित
एसएफसी मंडल प्रबंधक पवन चतुर्वेदी ने एक परिपत्र जारी कर जिला प्रबंधकों को आदेश दिए हैं कि एफसीआई गोदामों से गेहूं, चावल का उठान करने से पहले उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित कर ली जाए। इसके साथ ही, वजन आदि भी चेक किया जाए। चतुर्वेदी ने इसके लिए एक टीम भी गठित कर दी है। कहा है कि एफसीआई में रखे खाद्यान्न के नमूने भी भरे जाएं। टीम में डिप्टी आरएमओ आदि अफसर भी शामिल कर लिए जाएं। उन्होंने कहा है कि इसका कड़ाई से पालन हो अन्यथा संबंधित स्टाफ पर कठोर कार्रवाई होगी।