ऊंचे ताजियों के चलते शहर से गांवों तक दर्जनों स्थानों पर ‘ब्लैक आउट’ रहा। इससे बड़ी तादाद में लोग बेहाल रहे। किला उपकेंद्र से आधी रात तक करीब 10 घंटे सप्लाई गुल रही। बिजली सप्लाई न होने से पेयजल आपूर्ति भी ठप रही। ग्रामीण इलाकों में बिजली तार काटने के लिए लोग अड़े रहे तो कई स्थानों पर घंटों सप्लाई प्रभावित होने से लोगों ने हंगामा किया। कई स्थानों पर प्रशासन लचर दिखा और मनमानी करने वाले लोग हावी रहे।
शुक्रवार सुबह से ही गांवों में ऊंचे ताजियों और छड़ों से बिजली व्यवस्था अस्तव्यस्त रही, क्योंकि प्रशासन ने इसके लिए कोई तैयारी नहीं की थी। इससे आधी रात तक लोग अंधेरे में रहे। कुछ स्थानों पर तार काटने और सप्लाई बंद होने पर दूसरे समुदाय ने विरोध जताया, लेकिन लचर प्रशासन फौरी तौर पर फैसला नहीं ले पाया, इससे कई बार टकराव की स्थिति आ गई। शेरगढ़ में ऊंचे ताजिये निकालने के लिए अड़े लोगों ने जुलूस रोक दिया। दूसरे समुदाय ने तार काटने का विरोध किया। बाद में मनौना, दरावनगर आदि इलाकों में तार उतार कर जुलूस निकाला गया। आंवला, मीरगंज, बहेड़ी, नवाबगंज, फरीदपुर तहसीलों के दर्जनों गांवों के साथ ही फतेहगंज, रिठौरा, शाही, भोजीपुरा, सीबीगंज आदि इलाकों में जुलूस वाले रास्तों पर घंटों बिजली सप्लाई ठप रही। कुछ स्थानों पर दबाव के चलते सप्लाई बंद कर दी गई थी।
किला और पुराना शहर में रहा पानी का संकट
कोहाड़ापीर, पुराना शहर स्थित चक चुंगी, रोहली टोला, मीरा पैठ इलाके में बिजली लाइनें जुलूसों की वजह से करीब चार घंटे तक बंद रहीं, इससे शाम को इन इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित रही। सबसे ज्यादा खराब स्थिति किला उपकेंद्र से पोषित इलाकों में रही। शुक्रवार दोपहर सवा दो बजे से उपकेंद्र से सप्लाई बंद कर दी गई थी। अधीक्षण अभियंता एनके मिश्र ने बताया कि सुरक्षा कारणों से चिह्नित स्थानों पर लाइनें बंद कर दी थीं। किला उपकेंद्र से पोषित किला, जखीरा, साहूकारा, शास्त्रीनगर, रामपुर मार्ग, वाकरगंज, संदल खां बाजार, इंग्लिश नगर, बमनपुरी, मलूकपुर आदि इलाके रात करीब 12 बजे तक प्रभावित रहे। करीब 10 घंटे तक सप्लाई गुल रहने से लोग पानी को तरस गए। घरों में इंवर्टर भी जवाब दे गए।