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उर्दू की किताबों को लेकर बरेली कॉलेज में हंगामा, एबीवीपी ने कहा- कॉलेज को नहीं बनने देंगे एएमयू

Sun, 14 Oct 2018 12:10 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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धर्म, जाति तो कहीं क्षेत्रवाद के नाम पर दिलों में नफरतें पैदा करने का देश में माहौल पनप रहा है। इसी तरह की नफरत की एक चिंगारी बरेली कॉलेज में भी शनिवार को सुलग उठी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेताओं उर्दू भाषा की किताबों का ही विरोध कर दिया। उर्दू की किताबों का विरोध करते हुए कहा- बरेली कॉलेज को एएमयू नहीं बनने देंगे। यहां कोई मन्नान वानी जैसा आतंकी नहीं चाहिए। हंगामा करते हुए किताबें लेकर आई बस को कॉलेज के निकाल दिया। इससे पहले दूसरे समुदाय के छात्र वहां जमा होते प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने जैसे-तैसे मामला संभाला। बाद में एबीवीपी के नेताओं ने चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में हंगामा किया और चेतावनी दी कि अगर दोबारा बस आई तो ठीक नहीं होगा। इसे लेकर चीफ प्रॉक्टर और एबीवीपी नेताओं की नोकझोंक भी हुई।

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दरअसल, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के अधीन चलने वाली राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) की ओर से इन दिनों उन शिक्षण संस्थानों में कम दामों पर किताबें मुहैया कराई जा रही हैं जहां उर्दू विभाग हैं। बरेली कॉलेज में भी उर्दू से बीए और एमए के कोर्स चलते हैं। कुछ दिन पूर्व एनसीपीयूएल की तरफ से कॉलेज से अनुमति मांगी गई थी। शनिवार को परिषद की बस दिल्ली से उर्दू की किताबें लेकर कॉलेज पहुंची। इसमें कोर्स से जुड़ी और उर्दू साहित्य की किताबें थी। उर्दू के छात्र किताबें खरीद रहे थे, तभी एबीवीपी के कुछ नेता वहां पहुंच गए और किताबें देखने लगे। 

उर्दू की किताबें देख एबीवीपी ने विरोध करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में एबीवीपी के कई नेता वहां पहुंच गए। बस के साथ आए लोगों को हड़काने लगे। उर्दू विभाग की शिक्षिका डॉ. शाव्या त्रिपाठी ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन एबीवीपी नेताओं ने उनके साथ भी अभद्रता की। कहा- बरेली कॉलेज को एएमयू नहीं बनने देंगे। यहां उर्दू की किताबें किसकी इजाजत से बांटी जा रही हैं। इससे तो बरेली कॉलेज में भी कल को मन्नान वानी जैसे आतंकी पैदा होंगे। 
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दूसरे समुदाय के छात्र भी जुटने लगे तो हालात बिड़ते देख प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने जैसे-तैसे मामला शांत कराया, लेकिन एबीवीपी के नेता बस को बाहर निकालने पर ही शांत हुए। बाद में एबीवीपी नेताओं ने चीफ प्रॉक्टर ऑफिस में भी हंगामा किया। कहा, अगर बरेली कॉलेज में उर्दू विभाग है तो एएमयू में संस्कृत विभाग क्यों नहीं चलता। इस बात पर प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हो गई। कॉलेज का माहौल खराब न हो इसलिए बस को दोबारा अंदर नहीं आने दिया गया।

हमारे यहां उर्दू विभाग है इसलिए ही एनसीपीयूएल की ओर से किताबें आई थीं। उद्देश्य था कि छात्रों को कोर्स से जुड़ी और उर्दू साहित्य की किताबें कम दामों में मिल सकें। यह एमएचआरडी का ही प्रोग्राम है, उसका विरोध करने का क्या मतलब। किताबों में कोई आपत्ति जनक कंटेंट भी नहीं था, फिर क्यों उसका विरोध किया। एबीवीपी नेताओं को चेतावनी दे दी है फिर ऐसी हरकत न करें। - डॉ. वंदना शर्मा, चीफ प्रॉक्टर
 
कॉलेज में उर्दू की किताबें बांटने का क्या मतलब। ऊपर से बस लेकर आए लोगों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बदतमीजी से बात की, इसलिए ही विरोध किया। अगर इस बीच किसी छात्र ने दूसरे संदर्भ में अपनी बात कही हो तो मैं नहीं जानता। फिलहाल, उर्दू की किताबें कॉलेज में नहीं बंटने दी जाएंगी। अगर फिर बस आएगी तो हम देख लेंगे। - राहुल चौहान, जिला संगठन मंत्री एबीवीपी

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