पाकिस्तान की जेल में तीन साल यातना भरी सजा से रिहाई के बाद तमाम अड़चनों को पार करते हुए आखिर यशपाल अपने घर लौट आया।
वह जैसा गया था वैसा तो नहीं लौटा लेकिन माता-पिता को तसल्ली है कि बेटा किसी तरह लौट तो आया।
बरेली में यशपाल का जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया तो वहीं गांव में उसे देखने और मिलने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सब की चिंता अब उसकी सेहत है।
यातना ने भले ही उसे कुछ बीमार कर दिया लेकिन वह गांव की गलियों को नहीं भूला था, घर का रास्ता उसे अच्छी तरह याद था।
हालांकि गांव में उसे देखने के लिए उमड़ी भीड़ से वह थोड़ा असहज जरूर हो रहा था।
आलम यह कि गांव के मुहाने से घर तक कार से पहुंचने में एक घंटा लग गया। छोटे से घर में लोगों की भीड़, पेड़ों पर, दूसरे घरों की छतों पर लोग यशपाल को देखने के लिए खडे़ थे।
घर के दरवाजे पर खड़ी मां माया देवी ने जैसे ही यशपाल को देखा तो उनकी आंखें छलक गई। बहन का हाल भी कुछ ऐसा ही हुआ।
यशपाल को गले लगाकर दोनों रोने लगीं। थोड़ी देर के लिए माहौल गमगीन हो गया हालांकि खुशी के आंसू जल्द ही हंसी-खुशी में बदल गए।
यशपाल को रिहा कराने में विशेष प्रयास करने वाले डॉ. प्रदीप ने कहा कि तीन साल यातना तो हम वापस नहीं दिला सकते हैं लेकिन हमें तसल्ली है कि वह परिवार को वापस मिल गया।
ढाई महीने जूझने के बाद यह दिन देखने को मिला। उम्मीद है कि स्थानीय प्रशासन यशपाल के पुनर्वास और सेहत को लेकर मदद करने के लिए आगे आएगा।
मंगलवार रात बाघा बॉर्डर से रिहाई के बाद जागर संस्था के डॉ. प्रदीप, डॉ. संजय सक्सेना और संजय गुप्ता के साथ यशपाल और उसके पिता बाबूराम तकरीबन 18 घंटे की यात्रा पूरी कर बरेली पहुंचे। डॉ. प्रदीप और उनकी टीम यशपाल को परिवार के हवाले कर वापस लौट गए।
ऐसे पाकिस्तानी जेल पहुंचा यशपाल
उल्लेखनीय है कि 30 मई, 2010 को पाकिस्तानी सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में पाक सेना ने यशपाल को गिरफ्तार कर लिया था।
जासूस होने के शक में खुफिया एजेंसियों ने उससे कई दिनों तक पूछताछ की। पूछताछ में जब यशपाल के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो अदालत ने उसे सीमा उल्लंघन के आरोप में तीन साल की कैद की सजा सुना दी थी।
शुरुआत में यशपाल को पंजाब प्रांत के साहीवाल की जेल में रखा गया। बाद में अन्य भारतीय कैदियों के साथ उसे लाहौर की कोट लखपत जेल पहुंचा दिया गया।
30 मई को यशपाल की सजा की अवधि पूरी हो जाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार ने उसकी रिहाई को लेकर चुप्पी साधे रखी। बाद में सांसद मेनका गांधी और अन्य लोगों की मदद से उसकी रिहाई संभव हो पाई।
'परिवार को मिलेगी पूरी मदद'
डीएम अभिषेक प्रकाश ने यशपाल के परिवार को पूरी मदद का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि एसडीएम फरीदपुर को यशपाल के घर भेजा गया है। वह परिवार वालों से बातचीत कर उनके लिए सभी जरूरी प्रमाणपत्र तैयार कराएंगे, ताकि परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके।