बाराबंकी। पोषण पाठशाला और पोषाहार वितरण से भी अतिकुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। ऐसे में नौनिहालों का बचपन कुपोषण में बीतता दिख रहा है। स्वास्थ्य व बाल विकास विभाग द्वारा की गई जांच में 1746 बच्चे अतिकुपोषित और 7373 बच्चे कुपोषित की श्रेेेणी में मिले हैं। यह बात 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत दो लाख 95,482 बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आई है।
प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त समाज बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत जिले के 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों से महिलाओं व बच्चों को पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार व उपचार की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद जिले में इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
जिले के 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छह वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। विभाग से जो आंकड़े मिले हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिले के दो लाख 95 हजार 482 बच्चों की जांच में वजन, लंबाई आदि की माप की। इसमें 1746 बच्चे अति कुपोषित तो 7373 कुपोषित की श्रेणी में मिले हैं।
इनका वजन लंबाई के अनुपात में काफी कम पाया गया है। अब ऐेसे में बाल विकास विभाग की योजनाओं को लेकर सवाल उठ रहा है। विभाग प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दाल, दलिया, रिफाइंड ऑयल, चावल आदि उपलब्ध करा रहा है। इसके बाद भी अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। प्रभारी डीपीओ निधि ने बताया कि अति कुपोषित और कुुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।