बाराबंकी। यूक्रेन की राजधानी कीव में हो रहे धमाके की दहशत ने छात्र व उसके परिजनों की रातों की नींद छीन ली है। हर समय आसमान से गिरते बमों व मिसाइल का खतरा बना रहता है। ऐसे में सुरक्षित वतन वापसी की दुआ करके ही पूरा समय बीत रहा है। ऐसे में कालेज प्रशासन की पहल पर कुछ भारतीय छात्रों को बॉर्डर पर भेजने के बाद दिल में वतन वापसी की उम्मींद जगी है।
कुछ ऐसा ही हाल नगर कोतवाली के सत्यप्रेमीनगर मोहल्ला निवासी चंद्रप्रकाश शुक्ला के परिवार व यूक्रेन के उजरौथ शहर में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले बेटे प्रसून शुक्ला ने मोबाइल से हुई बातचीत में बया किया।
प्रसून यूक्रेन के उजरौथ नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस के चौथे साल की पढ़ाई कर रहा है। रूस व यूक्रेन में छिड़ी जंग के बाद यूक्रेन में फंसे छात्रों के परिवारीजन उनकी सलामती को लेकर काफी परेशान हैं। शनिवार को फोन पर प्रसून ने अमर उजाला को बताया की हालात काफी जटिल होते जा रहे हैं।
दहशत में रातों में भी नींद नहीं आती है। परिजनों से फोन पर बात कर समय काटने के साथ बस वतन वापसी का इंतजार है। एटीएम से रुपए निकालने से जेब खाली हो गई है तो किराए के कमरे मे बची खाद्य सामग्री से किसी तरह भूख मिटाई जा रही है।
बताया कि कालेज प्रशासन ने शनिवार को फर्स्ट व सेकंड ईयर के 240 छात्रों को निकालकर अमरी बॉर्डर पहुंचाया है। ऐसे में दूसरे राउंड में उन लोगों को भी बॉर्डर पर वतन वापसी की उम्मीद जगी है। उधर, पिता चंद्रप्रकाश का कहना है दिन भर पूरा परिवार टीवी पर यूक्रेन की खबरें देख देख कर परेशान है।
बेटे को वापस बुलाने की सारी कोशिशें काम नहीं आ रही है। टोल फ्री नंबर पर शनिवार को शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय से फोन आया था। जिसमें परेशान ना होने व बेटे को वापस आने के लिए सरकार के इंतजाम करने की बात बताई गई। बेचैनी बढ़ने पर दिन हो या रात बेटे से फोन पर बात कर दिल को तसल्ली मिल जाती है ।