जिले में डेंगू से मरने वालों का सिलसिला जारी है। सोमवार देर रात से मंगलवार दोपहर तक एक सिपाही व एक किशोरी की डेंगू की चपेट में आकर मौत हो गई। जबकि शहर में दो युवकों में डेंगू की पुष्टि हुई है। दोनों का समय रहते उपचार होने से खतरे से बाहर चल रहे हैं। जिले में इससे पहले हुई आठ मौतों में से स्वास्थ्य विभाग मात्र तीन मौत डेंगू से होना बता रहा है। पुलिस लाइंस में सिपाही का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
जिले के मसौली थाने पर तैनात सिपाही जगन्नाथ (43) पुत्र चौधरीराम दो दिन से तेज बुखार था। परिवारीजनों ने सोमवार को सुबह जगन्नाथ को लखनऊ के सहारा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां सोमवार देर रात उनकी मौत हो गई। जगन्नाथ मूलरूप से अंबेडकर नगर जनपद के थाना जैतपुर क्षेत्र के ग्राम बेरमा के निवासी थे। सिपाही की मौत के बाद मां भगना व पत्नी शीला का रो-रोकर बुरा हाल है।
दोनों का कहना है कि एक ही दिन में प्लेटलेट्स काफी कम होने के चलते उनकी मौत होने की बात चिकित्सकों द्वारा बताई गई। वहीं कस्बा त्रिलोकपुर निवासी सीमा बानों (14) पुत्री कुंदन रविवार को तेज बुखार व शरीर में चकत्ते आने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया था। जहां से उसे केजीएमयू रेफर किया गया था। मंगलवार दोपहर सीमा बानों की मौत हो गई। अब तक जिले में डेंगू से 10 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब एक दर्जन मरीजों का उपचार सरकारी व गैरसरकारी अस्पतालों में उपचार हो रहा है।
शहर के दशहराबाग निवासी शिवम वर्मा (22) सुशील कुमार सोमवार को तेज बुखार आने पर निजी पैथालॉजी में ब्लड टेस्ट कराया गया, जिसमें प्लेटलेट्स करीब 30 हजार से कम थी। वहीं गांधी आश्रम कॉलोनी निवासी सौरभ मौर्य (20) पुत्र दूधनाथ मौर्य की भी प्लेटलेट्स 32 हजार जांच में निकली है। आयूष चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा ने बताया कि दोनों की हालत में काफी सुधार है।
सिपाही का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
डेंगू की चपेट में आने से मसौली थाने में तैनात सिपाही जगन्नाथ की मौत के बाद पुलिस लाइंस में उनका अंतिम संस्कार किया गया। यहां पर मौजूद पुलिस अधीक्षक राजूबाबू, एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह, सीओ सिटी श्रीपाल यादव, आरआई बालकृष्ण समेत कई पुलिस अधिकारी व सभी थानों के थानाध्यक्षों ने दुखी परिवार को साहस देते हुए ढांढस बंधाया। मसौली थानाध्यक्ष अवधेश यादव ने बताया कि जगन्नाथ निडर एवं साहसी पुलिसकर्मी थे। ड्यूटी के समय हमेशा मुस्तैद रहते थे। थाने को उनकी कमी हमेशा महसूस होती रहेगी।