बाराबंकी। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा जमकर गूंजा। इस दौरान नाराज सभासदों ने साफ सफाई न होने व अस्पतालों में इलाज की उचित व्यवस्था न मिलने पर जमकर हंगामा किया। सदस्यों से लेकर विधायक तक ने गांवों में सफाई कर्मियों के न आने व अटैचमेंट पर कड़ी नाराजगी भी जताई। इसके साथ ही बैठक में बिजली, सिंचाई, लोक निर्माण व शिक्षा विभाग की समस्याओं का मसला भी जोर शोर से उठा।
जिला पंचायत सभागार में शनिवार को जिला पंचायत बोर्ज की बैठक अध्यक्ष राजरानी रावत और राज्यमंत्री सतीश शर्मा की माैजूदगी में हुई। बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि पीएचसी पर डॉक्टर, उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सीएचओ नहीं मिलते। निजी पैथालॉजी गलत रिपोर्ट दे रही हैं। शहर के आस्था अस्पताल समेत ज्यादातर जगह आयुष्मान कार्डधारकों से धन उगाही हो रही है। डॉक्टर अटैचमेंट के सहारे नौकरी कर रहे हैं। गत बैठक में आई शिकायतों पर कार्रवाई, अवैध व पंजीकृत अस्पतालों का ब्योरा मांगने पर एसीएमओ जवाब नहीं दे पाए। इस पर चेताया गया कि बिना तैयारी के बैठक में उपस्थित न हुआ करें।
ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये भुगतान की स्थिति के बारे में भी स्वास्थ्य महकमा कोई जानकारी नहीं दे पाया। सदस्यों ने कहा कि ज्यादातर ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी नहीं आ रहे हैं। उनका संबद्धीकरण ब्लॉक से लेकर जिले पर है। मांग की कि अटैचमेंट समाप्त कर सफाई कर्मियों को गांव में भेजा जाए। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे खराब होने, बिजली की विजलेंस जांच, सड़क निर्माण, सिंचाई समस्या, प्राथमिक विद्यालयों तक सड़क न बनाए जाने की समस्याएं भी उठाई गईं। सीडीओ अ. सुदन ने सभी समस्याओं का विभागवार स्तर पर शीघ्र निस्तारण कराने का भरोसा दिलाया।
इनकी रही मौजूदगी
एमएलसी अंगद कुमार सिंह, विधायक सदर सुरेश यादव, जैदपुर गौरव रावत, हैदरगढ़ दिनेश रावत, रुदौली प्रतिनिधि रामचंद्र यादव, डीडीसी रामबरन, गुलाब सिंह, नेहा सिंह आनंद, ओमप्रभा, शशि सिंह राजपूत, डॉ. उमासरन वर्मा, चक्खन यादव, हंसराज, अशफाक, पूजा सिंह, ब्लॉक प्रमुख आकाश पांडेय, धर्मेंद्र यादव, पीडी मनीष कुमार, डीसी मनरेगा ब्रजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
11 साल बाद बढ़ी लाइसेंस फीस
बैठक में सबसे पहले एएमए आशुतोष कुमार ने गत बैठक की कार्रवाई की पुष्टि कराई। साथ ही जिला पंचायत से पास होने वाले पशुबाजार एवं मानचित्र की दरों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया। वर्ष 2011 से के बाद से अब तक संशोधन नहीं हुआ था।