सिंचाई विभाग की लापरवाही से बृहस्पतिवार की सुबह शारदा सहायक नहर चमरौली गांव के पास कट गई। बीस मीटर लंबाई में पटरी कटने से तेज बहाव के साथ निकला पानी कुछ ही घंटों में खेतों में भर गया।
खेतों में काम कर रहे किसान तेजी से भर रहे पानी को देख भाग खड़े हुए। करीब एक हजार बीघा क्षेत्रफल में पानी भर गया। सैकड़ों बीघा मेंथा की फसल डूब गई तो गन्ना खेतों में भी पानी भर गया। छह गांवों के अंदर तक पानी घुस गया।
क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार शाम तक सिंचाई विभाग द्वारा पानी के बहाव को रोकने के सभी प्रयास विफल रहे हैं। कटान को पाटने के लिए तीन जेसीबी और करीब डेढ़ सौ ग्रामीणों को लगाया गया है।
ग्रामीणों व प्रधान ने बताया कि नहर पटरी में रिसाव की सूचना विभागीय अधिकारियों को करीब पांच दिन पहले ही दे दी गई थी लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
दरियाबाद थानाक्षेत्र में चमरौली रेग्यूलेटर के करीब दौ सौ मीटर पहले ही शारदा सहायक नहर खंड-25 के दक्षिणी पटरी बृहस्पतिवार की सुबह करीब पांच बजे तेज आवाज के साथ टूट गई। तेजी के साथ खेतों में पानी भरने लगा।
खेतों में मेंथा की निराई कर रहे किसान कमर रसूल ने खेतों में पानी भरता देखा तो इसकी सूचना अन्य गांव वालों को दी। तेजी से खेतों में पानी भरता देख खेत में काम कर रहे किसान खेत से भाग खड़े हुए। देखते ही देखते मेंथा, सब्जी व गन्ना की एक हजार बीघा की फसल में पानी भर गया।
नहर पटरी कटान से चमरौली, गुलचप्पा, केन्हौरा, अलियाबाद, रसूलपुर, बरुआ के 250 किसान प्रभावित हुए हैं। प्रभावित किसानों अहमद रसूल, सुमिरन, अच्छन, आमिर अली, हाजी अहमद, सुरेश, कन्हई, इलाल, मुन्ना, हसीब, रज्जन, रामचंद्र, कुलदीप, छदन, एहरान व लालू आदि ने बताया कि मेंथा की फसल को सबसे अधिक नुकसान होगा।
गन्ना के खेतों में बालू भरने से नुकसान होगा। प्रधान गया बक्स यादव व ग्रामीण सुमिरन, आमिर अली, सुरेश व कंहई ने बताया कि पानी आने के बाद से ही तटबंध से पानी का रिसाव हो रहा था।
करीब पांच दिन पहले इसकी सूचना दी विभाग के कर्मचारी व अधिकारियों को दी गई थी। खेतों के साथ-साथ चमरौली, गुलचप्पा, केन्हौरा, अलियाबाद, रसूलपुर, बरुआ गांवों में पानी घुस गया है। लोगों के घरों के सामने दो से तीन फिट तक पानी भर गया है।
ताल-तलैया सब भर गए हैं। संपर्क मार्गों पर पानी ऐसे बह रहा है जैसे बाढ़ के दिनों में हालात होते हैं। लगातार बढ़ रहे पानी से ग्रामीणों को अब अपना सामान बचाने की चिंता सताने लगी है।