गनेशपुर/ कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी में उफान आने से तराई के तीन दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदी का पानी खतरे के निशान से 42 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तराई में हड़कंप मचा हुआ है।
गांवों को जाने वाले रास्तों पर पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी गांवों में भर जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं दी जा रही है जिससे मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार नदी का पानी खतरे के निशान से 42 सेमी. ऊपर पहुंच गया है, जलस्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इससे रामनगर तहसील क्षेत्र के नामेपुर सिरौली, परसादी पुरवा, तपेसिपाह, मल्लाहन पुरवा, कोरियन पुरवा, दुर्गापुर, लहडरा तथा सूरतगंज क्षेत्र के बतनेरा, सरसंडा, बल्लोपुर द्वितीय, पर्वतपुर, अकौना व सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के टेपरा, सनावा, कहरान पुरवा, गोबरहा, तेलवारी, सरायं सुर्जन, बघौलीपुरवा, नव्वनपुरवा, मंझारायपुर, मांझा आदि गांव पूरी तरह से पानी से घिर गए हैं। इससे लोगों की दिक्कतें और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं।
नदी का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे कोठी डीहा, सिरौलीगूंग, बाबूरी, बेहटा, घुटरू, भयकपुरवा व सरदाहा आदि गांव किसी भी समय बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। लोगों का आरोप है कि गांव के चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है।
सूरतगंज में सरयू नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का पानी हेतमापुर स्थित बाबा नारायन दास मंदिर में भी घुस गया है। कानूनगो हर्षित पांडे स्टीमर से बाढ़ प्रभावित गांवों का भ्रमण कर लोगों से सुरक्षित स्थान की ओर जाने की अपील कर रहे हैं।
एक महीने से गांवों में पानी भरा होने से सिर्फ तटबंध पर सुंदरनगर, ललपुरवा के ही बाढ़ पीड़ित नजर आ रह रहे थे लेकिन नदी के रूप को देखकर अब अन्य गांवों के लोग भी तटबंध पर पहुंचने लगे हैं। नदी का पानी इतना बढ़ गया है कि तटबंध के समीप से पानी करीब पांच सौ मीटर तक सड़क पर बह रहा है। उपजिलाधिकारी रामनगर राजीव शुक्ला ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद पहुंचाई जा रही है।
गोबरहा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। यहां से अब लोगों को इलाज की सुविधा मिलना मुश्किल है। शंकर जी का मंदिर सहित अन्य स्थान बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। क्षेत्र के लगभग सभी सरकारी व प्राइवेट हैंडपंप पानी में डूब गए हैं जिससे यहां पेयजल का संकट गहराने लगा है। लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट मोड पर चल रहे तहसील प्रशासन के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे बाढ़ से बचाव के इंतजाम कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। लोगों को न तो गांव से बाहर निकलने के लिए नावें ही मिल पा रही हैं और नहीं बाढ़ चौकियों पर ही कोई इंतजाम है। एसडीएम सिरौलीगौसपुर सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा ने बताया कि तहसीलदार को मौके पर भेजकर चिह्नित जगह पर नाव की व्यवस्था कराई जा रही है।
एडीएम संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी का पानी खतरे के निशान से 42 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तीनों तहसीलों के एसडीएम को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नावें आदि मुहैया कराने के लिए कहा गया है। प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।