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सरयू फिर लाल निशान के पार, कई गांवों में दहशत

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बाराबंकी। हेतमापुर से सुंदरनगर जाने वाले मार्ग के बह जाने के बाद सोमवार को नाव से सुंदरनगर जाते ग - फोटो : BARABANKI
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गनेशपुर/ कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू का पानी फिर से उफान पर है। नदी का पानी खतरे के निशान से 15 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए तराई के एक दर्जन से ज्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। यहां के लोगों ने परिवारीजनों के साथ पलायन शुरू कर दिया है। लेकिन सुरक्षित स्थान न होने की वजह से लोग तटबंध पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं।
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तराई के लोगों का कहना है कि नदी का पानी दूसरी बार खतरे के निशान के पार पहुंचा है लेकिन प्रशासन न पहले गंभीर दिखा था और न ही इस बार भी गंभीर दिख रहा है जिसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार, नदी का पानी दूसरी बार खतरे के निशान से 15 सेमी. ऊपर पहुंचा है। लेकिन जिस रफ्तार से नदी का पानी बढ़ रहा है उससे खतरा अभी बना हुआ है। प्रशासनिक अमला इसको लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है।
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कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू का जलस्तर बढ़ने के बाद सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के सनावा, टेपरा, कहारनपुरवा, सिरौलीगूंग, कोठी डीहा, बाबूरी, परसा, घुंटरू, बघौला पुरवा, सरायंसुर्जन, भैरवकोल, गोबरहा, पंडित पुरवा, तेलवारी, इटहुआ, नव्वनपुरवा, बेहटा, परसवाल, मंझारायपुर आदि गांव पानी से घिर गए हैं।
नदी के पानी के गांव तक पहुंचने से यहां के लोगों में हड़कंप मच गया है और लोगों ने गांव खाली करना शुरू कर दिया है। यहां के लोग परिवारीजनों के साथ पलायन करने लगे हैं लेकिन पर्याप्त नावें न मिल पाने के कारण बाढ़ पीड़ितों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां के लोग परिवारीजनों के साथ अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर शरण लेने को मजबूर हैं।
विधायक और पूर्व मंत्री ने लिया जायजा
सूरतगंज। तराई क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। ऐसे में सैकड़ों परिवार तटबंध पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं। इन गांवों में बाढ़ राहत सामग्री पाने के लिए हाहाकार मचा हुआ है। दैनिक उपयोग की सामग्री के साथ भोजन और मवेशियों के चारे के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार को भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री ने बाढ़ क्षेत्र का जायजा लिया है। साथ ही एसडीएम व नायब तहसीलदार को हरसंभव मदद दिये के निर्देश दिए। क्षेत्र में सरयू का जलस्तर बढ़ने से सरसंडा, बबुरी, जमका, परशुरामपुर, बाबापुरवा, कोडरी, बेलहरी, पूरनपुर, फाजिलपुर, केदारीपुर, बलाईपुर, कचनापुर, सुंदरनगर, हेतमापुर, कोडरी, मदरहा आदि गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
गांव को जाने वाले तमाम रास्तों के कटने व उनके ऊपर बाढ़ का पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों का आवागमन भी पूरी तरह से बंद हो गया है। सबसे खराब स्थिति उन गांवों की है जिन गांवों में एक पखवारा से पानी भरा है। सोमवार को क्षेत्रीय विधायक शरद कुमार अवस्थी, एसडीएम रामनगर राजीव शुक्ला के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और आवश्यक निर्देश दिए।
वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप ने तटबंध पर पहुंच बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनका हाल जाना। इस दौरान पूर्व मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री एवं बच्चों में बिस्कुट का वितरण किया। इस मौके पर नायब तहसीलदार आकाश संत, प्रभारी निरीक्षक वीरेन्द्र बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
फसल हाथ न लगी तो हो जाएंगे बर्बाद
यहां के निवासी रविनंदन, सोनू, रामू, राजकुमार, लवकुश का कहना है कि हम लोगों का परिवार गन्ना और धान की फसल से चलता है। लेकिन दो बार नदी का पानी फसलों को डूबा चुका है। इससे साफ है कि इस बार फसल को बचा पाना आसान नहीं होगा। यदि फसल हम लोगों के हाथ नहीं लगी तो हमारा बर्बाद होना तय है। लेकिन प्रशासन इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है।
सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इसके देखते हुए तहसील प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। राजस्व निरीक्षकों के साथ ही बाढ़ में लगे कर्मियों को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है। हम किसी भी आपात स्थिति से निपटने को पूरी तरह से तैयार हैं।
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-सुरेन्द्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम, सिरौलीगौसपुर
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