बाराबंकी। बसपा इन दिनों अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि बसपा इस चुनाव में अपना कैडर वोट भी सहेज पाने में पूरी तरह से नाकाम रही है। तभी तो उसके प्रत्याशी चुनाव में तीसरे और चौथे स्थान पर रहे।
बाराबंकी सदर सीट से बसपा के टिकट पर सुरेंद्र सिंह वर्मा ने पिछला चुनाव लड़ा था और उन्हें 90 हजार वोट मिले थे। इस बार बसपा ने डॉ. विवेक को मैदान में उतारा और वह 42 हजार वोट ही पा सके। इसी प्रकार दरियाबाद सीट से 2017 का चुनाव बसपा के टिकट पर मुब्बशिर ने लड़ा था और 54 हजार वोट हासिल किए थे। जबकि इस बार बसपा ने जगप्रसाद को मैदान में उतारा जिन्हें महज 28 हजार वोट ही मिले। जबकि 2017 में हैदरगढ़ सीट से बसपा ने कमला प्रसाद पर दांव लगाया था और उन्हें 48 हजार वोट मिले थी।
वहीं इस बार श्रीचंद को सिर्फ 12 हजार वोट ही मिल सके। बसपा ने 2017 में कुर्सी सीट से वीपी सिंह को मैदान में उतारा था और उन्हें 51 हजार वोट मिले थे जबकि इस बार मीता गौतम को महज 35 हजार वोट ही मिल सका। बसपा ने जैदपुर सीट से 2017 में मीता गौतम को चुनाव लड़ाया था और उन्हें यहां से 48 हजार वोट मिले थे। जबकि बसपा ने इस बार ऊषा सिंह को मैदान में उतारा जिन्हें महज 18 हजार वोट से ही संतोष करना पड़ा।
बसपा ने 2017 में रामनगर सीट से हफीज भारती को चुनाव मैदान में उतारा था और इन्हें 53 हजार वोट मिले थे। जबकि इस बार बसपा के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे रामकिशोर शुक्ला को महज 23 हजार वोट ही मिले। जानकारों का कहना है कि बसपा का इससे खराब प्रदर्शन कभी नहीं रहा है और वह अपना कैडर वोट बैंक भी सहेज पाने में पूरी तरह से नाकाम रही है।