बाराबंकी। आजादी के बाद बनी पहली विधानसभा से लेकर अब तक दो चेहरे ऐसे हुए जिन्होंने छह बार जीतने का रिकॉर्ड बनाया। जबकि पांच, चार और तीन बार जीतने वालों का रिकॉर्ड भी कोई नहीं तोड़ पाया। आज भी बाराबंकी जिले की राजनीतिक रूप से चर्चा होती है तो लोगों की जुबान पर बरबस ही यह नाम आ जाते हैं।
छह बार विधायक बनने वालों में पूर्व केंद्रीय मंत्री व जिले के कद्दावर नेता रहे बेनी प्रसाद वर्मा का नाम सबसे पहले आता है। बेनी बाबू 1974 में दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से भारतीय क्रांति दल के विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद बेनी बाबू ने 1977 से 1980 तक मसौली विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के विधायक रहे।
1985 से 1989 तक मसौली क्षेत्र से ही लोकदल के विधायक रहे। 1989 के चुनाव में बेनी बाबू फिर मसौली से ही जनता दल के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद 1991 से 1992 तक मसौली क्षेत्र से ही जनता पार्टी के विधायक रहे और 1993 में समाजवादी पार्टी से फिर एक बार मसौली से विधायक बने।
हालांकि छह बार विधायक बनने के अलावा सांसद का चुनाव जीतने वाले बेनी बाबू प्रदेश व केंद्र सरकार में मंत्री रहे। छह बार जीतने वाले दूसरे नेता है राजीव कुमार सिंह। खास बात यह है कि राजीव कुमार सिंह लगातार दरियाबाद से ही विधायक होते रहे। साल 1985 में निर्दल उम्मीदवार के रूप में राजीव कुमार सिंह ने जब जीत का स्वाद चखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद वह कांग्रेस से 1989 में, भाजपा से 1996 में, भाजपा से ही 2002 में विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2007 से 2012 और 2012 से 2017 तक दरियाबाद के विधायक रहे।
फरीद महफूज किदवई भी पांच बार विधायक बने। 1985 में हुए दलित मजदूर किसान पार्टी के टिकट पर रामनगर से विधायक हुए थे। इसके बाद जनता पार्टी के टिकट पर रामनगर से ही 1991 में चुने गए। 1996 व 2007 में मसौली से बसपा विधायक और 2012 में कुर्सी से सपा विधायक के तौर पर जीत दर्ज की।
इसी प्रकार नत्थाराम रावत चार बार विधायक बने। आजादी के बाद जब दूसरी विधानसभा का गठन हुआ तो 1957 में नत्थाराम सोशलिस्ट पार्टी से बाराबंकी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हुए। 1962 में सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर ही कुर्सी से, 1969 में कांग्रेस के टिकट पर फतेहपुर से और 1985 में भी कांग्रेस आई के टिकट पर फतेहपुर से विधायक चुने गए।
इसी तरह से राम आसरे वर्मा तीन बार विधायक बने। 1952 में रामनगर से सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुए। 1962 में तत्कालीन भिटौली विधानसभा क्षेत्र से और 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से रामनगर के विधायक निर्वाचित किए गए। 1957 में हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ने वाले जंगबहादुर वर्मा हैदरगढ़ से ही तीन बार विधायक बने।
साल 1957 के बाद 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर और 1974 में भारतीय क्रांति दल के टिकट पर उनका निर्वाचन हुआ। इसी प्रकार समाजवादी पार्टी के बुजुर्ग नेता रामसागर रावत भी तीन बार विधायक रहे। रामसागर 1977 में सिद्धौर से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद सिद्धौर से ही 1980 में जनता एस. चरण सिंह पार्टी से और 1985 में लोक दल से विधायक बने।